
पहाड़ का सच/एजेंसी।

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा सांसद और कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे राघव चड्ढा ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर आप छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके साथ राज्यसभा के 6 अन्य सांसदों ने भी बीजेपी जॉइन की है। राघव चड्ढा ने ऐलान करते हुए कहा कि वह दो तिहाई सांसदों के साथ बीजेपी में विलय कर रहे हैं। यहां बीजेपी में शामिल होने को तकनीकी रूप से विलय कहा जा रहा है जो दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए एक कानूनी कदम है।

आप के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 का एक साथ इस्तीफा
भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली 14 साल पुरानी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने एक साथ इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इन सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
आप’ के इस विभाजन से भाजपा ने न केवल उसके सांसदों को अपने साथ जोड़ा है बल्कि उसकी आंतरिक कमजोरियों को उजागर करते हुए मनोबल भी तोड़ा है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसदों में से सात के एक साथ अलग होने से दल-बदल कानून की जरूरी दो तिहाई संख्या भी पूरी की गई है। भाजपा में शामिल होने पर उच्च सदन में भाजपा की संख्या मौजूदा 106 से बढ़कर 113 हो जाएगी। एनडीए की संख्या भी 134 से बढ़कर 141 तक पहुंच जाएगी। आप पर लोकसभा में खतरा बढ़ गया है। सूत्रों के अनुसार, उसके तीन में से दो सांसद भाजपा के संपर्क में हैं।
आप ने कहा भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’
वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है। आप नेताओं का आरोप है कि भाजपा पंजाब में उनकी सरकार के अच्छे कामों को रोकने के लिए साजिश रच रही है और सांसदों की खरीद-फरोख्त कर रही है।

लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखे का हक – अन्ना हजारे
इस मामले में समाजसेवी अन्ना हजारे का बयान भी आया है। उनके ही भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकलकर आम आदमी पार्टी बनी थी और वह राजनीतिक दल के गठन को लेकर असहमत थे। अन्ना हजारे का कहना है कि इन सांसदों के पार्टी छोड़ने का मतलब है कि सब कुछ सही नहीं चल रहा है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखे का हक है। चड्ढा और अन्य लोगों को कुछ परेशानी हुई होगी, तभी उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आप की लीडरशिप की कमी है। यदि पार्टी सही रास्ते पर चली होती तो ये लोग बाहर नहीं जाते। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नेताओं को दल में कुछ परेशानी जरूर हुई होगी। यदि आम आदमी पार्टी सही रास्ते पर चलती तो वे साथ ही बने रहते। उन्होंने कहा कि कुछ और भी कारण हो सकते हैं। लेकिन लोकतंत्र में तो यह किसी का भी हक है कि वह चाहे तो किसी दल में रहे या फिर छोड़ दे।

