
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌤️ *दिनांक – 21 अप्रैल 2026*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत – 1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – ग्रीष्म ऋतु*
⛅ *अमांत – 8 गते वैशाख मास प्रविष्टि*
⛅ *राष्ट्रीय तिथि – 1 वैशाख मास*
🌤️ *मास – वैशाख*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पंचमी 22 अप्रैल रात्रि 01:19 तक तत्पश्चात षष्ठी*
🌤️ *नक्षत्र – मृगशिरा रात्रि 11:58 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
🌤️ *योग – शोभन दोपहर 12:31 तक तत्पश्चात अतिगण्ड*
🌤️*राहुकाल – शाम 03:30 से शाम 05:07 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 05:44*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:48*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *पापनाशिनी, पुण्यप्रदायिनी गंगा* 🌷
➡ *23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) है ।*
🙏🏻 *जैसे मंत्रों में ॐकार, स्त्रियों में गौरीदेवी, तत्त्वों में गुरुतत्त्व और विद्याओं में आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में गंगातीर्थ विशेष माना गया है। गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया हैः*
🌷 *संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते।*
*तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः।।*
🙏🏻 *’देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करने वाली हैं । आप जीवनरूपा है। आप आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करने वाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है।'(स्कंद पुराण, काशी खं.पू. 27.160)*
🙏🏻 *जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में गंगा जी में गोता मारने से विशेष सात्त्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है। वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की अमावस्या तथा कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष पुण्यलाभ होता है।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *गंगा स्नान का फल* 🌷
➡️ *23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) है ।*
🙏🏻 *”जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है ।” (पद्म पुराण , उत्तर खंड)*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
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