
देहरादून। आज उतराखंड क्रांति दल के महानगर अध्यक्ष प्रबीन चन्द रमोला द्वारा केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता की गयी, उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि शासन प्रशासन राज्य सरकार की कठपुतली बनकर कार्य ना करे, एवं जनता के मुद्दों को गंभीरता से लेकर समाधान की ओर लेकर जाए।

बीते दिनों महानगर अध्यक्ष प्रबीन चन्द रमोला के नेतृत्व में निजी स्कूलों में अवैध रूप से हो रही शुल्क वृद्धि, शिक्षा के अधिकार में अपात्रों का चयन कर असहाय परिवारों को वंचित रखने तथा निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन ना देने को लेकर जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से शिक्षा मंत्री को शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपा गया था। जिसकी सूचना पूर्व में जिलाधिकारी कार्यालय को दे दी गयी थी, लेकिन ज्ञापन सौंपने के दो दिन बाद जिस प्रकार से उक्रांद कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर संवैधानिक प्रकार से मुकदमे दर्ज किये गए, यह सत्तासीन दल द्वारा पोषित शिक्षा माफियाओं की बौखलाहट को साफ दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हम झूठे मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं, लेकिन हम जिला प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि वह इन मुकदमों को तत्काल वापस करे, अन्यथा जन आंदोलन खड़ा किया जायेगा।
लोकतांत्रिक देश में जिस प्रकार नौकरशाह जनता की आवाज को ना सुनकर केवल सत्तासीन पार्टी के बनकर रह गए हैं, यह आम जन मानस के संवैधानिक अधिकारों का हनन है, आज पूरे राज्य में शिक्षा माफिया तथा सरकार का मजबूत गठजोड़ शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ाकर अभिभावकों का मानसिक शोषण कर रहे हैं, निजी स्कूलों में प्रतिवर्ष शुल्क वृद्धि, एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क, नये किताबों को लेकर दबाव, तथा प्रत्येक सामान को अपने कमिशन की आड़ में निर्धारित दुकानों से लेने की चेतावनी दी जाती है, साथ ही प्रत्येक वर्ष स्कूल की यूनिफॉर्म को बदलना प्रत्येक निजी स्कूल के व्यापार का हिस्सा हो गया है।
आज देहरादून में बिना नक्शा पास किये, बिना अग्नि समन विभाग द्वारा अनापति प्रमाण पत्र के, तथा बिना क्रीड़ा मैदान के कई सारे स्कूल सरकार की सह पर संचालित किये जा रहे हैं, तथा कई स्कूल का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है पूर्व में जिलाधिकारी को चेतावनी देने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द की गयी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि स्कूल की आड़ में अभिभावकों को खून चूसने वाले स्कूल मालिको के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
उक्रांद माँग करता है कि प्रत्येक निजी स्कूल में अभिभावकों के लिए जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से एक काउंसलिंग सेल लगे ताकि कोई भी अभिभावक स्कूल की गैर कानूनी गतिविधियों को आसानी से शिक्षा विभाग को बता सके, दूसरी ओर आज जिस प्रकार से शिक्षा के अधिकार ( Right to Education) में गरीब से नीचे जीवन यापन करने वाले पात्रों को छोड़कर सामान्य वर्ग को फर्जी तरीके से रखा जा रहा है, ऐसे स्कूल एवं संबंधित अधिकारियों पर तत्काल कानूनी कारवाई हो, साथ ही निजी स्कूलों में पढ़ा रहे अध्यापकों के हकों पर भी डाका डाला जा रहा है, उन्हे ऑफिशियल दस्तावेजों में उन्हे उचित वेतन दिखाकर उन्हे बहुत कम वेतन दिया जाता है, साथ ही 10 घण्टे कार्य लेकर मानसिक शोषण किया जा रहा है। यदि किसी ने आवाज उठाई तो तत्काल स्कूल से बाहर किया जाता है, जहाँ एक ओर राज्य के शिक्षा मंत्री फीता काटने में व्यस्त है वही शिक्षा माफियाओं के हौंसले निरंतर बुलन्द होते जा रहे हैं।
महानगर अध्यक्ष देहरादून ने साथ ही सलाह दी कि जनता के मुद्दों पर ईमानदारी से अपना कार्य करे तथा सभी निजी स्कूलों का तत्काल औचक निरीक्षण किया जाए, जिसमें महिला एवं बाल कल्याण आयोग भी बच्चों से व्यवहारिक जीवन के विषय में सवाल पूछे, ताकि शिक्षा के अलावा भी उनके मानसिक स्वास्थ्य का पता चल सके।
इस अवसर पर महानगर महामंत्री निशिथ मनराल, संगठन मंत्री कपिल कुमार, गिरीश कोठरी, भोला चमोली, गजेंद्र नेगी,राम भट्ट, संतोष नौटियाल,किशोर बहुगुणा, मनोज भट्ट,कामना बिजलवान, प्रेम पडियार दिनेश पंत सहित कही कार्यकर्ता उपस्थित रहें
