
रोमियो लेन प्रकरण पर आईजी व विधायक अरविंद पाण्डेय के लेटर की जांच की मांग
पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल व पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में राज्यपाल से मिले कांग्रेसी
पहाड़ का सच देहरादून। राज्य में घटित कई अपराधिक प्रकरणों की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच तथा देहरादून के ‘रोमियो लेन बार प्रकरण में आईजी गढ़वाल की संदिग्ध भूमिका, विधायक अरविन्द पाण्डेय द्वारा सरकार पर लगाये गये गम्भीर आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को राज्यपाल से भेंट की। पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल व पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में विधायक व पार्टी नेता मौजूद थे।
राज्यपाल को संबोधित पत्र में कहा गया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है तथा राज्य की कानून व्यवस्था से आम आदमी का भरोसा उठता जा रहा है। विगत कुछ समय में राज्य में घटित विभिन्न प्रकरणों की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराते हुए अवगत कराना चाहते हैं कि कई प्रकरणों ने प्रदेश की कानून व्यवस्था एवं पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं, पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल सिलसिलेवार घटित निम्न प्रकरणों की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराते हुए राज्य सरकार एवं पुलिस प्रशासन को उचित दिशा-निर्देश देने की मांग करता है:
देहरादून के राजपुर रोड स्थित ‘रोमियो लेन बार में घटित घटनाक्रम ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था ही नहीं पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। रोमियो बार प्रकरण से पुलिस विभाग के भीतर समन्वय की कमी तो उजागर हुई ही है साथ ही पुलिस के उच्च अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं तथा आम जनता के बीच यह संदेश गया है कि कानून का पालन कराने वाले ही नियमों के उल्लंघन को संरक्षण दे रहे हैं। उक्त प्रकरण में जिस प्रकार से घटनाएं सामने आई हैं, उससे यह प्रतीत होता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही अथवा कानून व्यवस्था में प्रभावशाली व्यक्तियों का हस्तक्षेप हो रहा है। साथ ही रोमियो बार प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की आम चर्चाएं सामने आ रही हैं जिससे घटना के तथ्यों एवं पुलिस कार्यवाही को लेकर आमजन एवं मीडिया में संदेह की स्थिति बनी हुई है।
इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही के चलते सुरक्षा व्यवस्था एवं बार संचालन नियमों के अनुपालन में गंभीर चूक की आशंका बनी हुई है। यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि उक्त स्थान पर लम्बे समय से नियमों के विरुद्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। रोमियो बार प्रकरण में प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के चलते मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जानी नितांत आवश्यक है ताकि दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। रोमियो बार सहित प्रदेश के सभी बार एवं पब की सुरक्षा एवं वैधानिक जांच कराई जाए। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु कठोर दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा के गदरपुर विधायक अरविन्द पाण्डेय द्वारा अपनी सरकार पर पुलिस के माध्यम से उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने एवं उनके खिलाफ षड़यंत्र करने का आरोप लगाये गये हैं जिनकी जांच कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लिखे पत्र में गदरपुर विधायक ने कहा है कि सरकार द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंहनगर के माध्यम से उन्हें राजनैतिक व सामाजिक जीवन समाप्त करने की लगातार धमकी दी जा रही है।
कांग्रेस ने कहा कि सरकार द्वारा अपनी शक्तियों तथा पुलिस प्रशासन का दुरूपयोग करते हुए अरविन्द पाण्डेय एवं उनके परिजनों के खिलाफ झूठे मुकदमें लगाकर लगातार उत्पीडन किया जा रहा है। अरविन्द पाण्डेय ने मुख्यमंत्री से अपनी जान को खतरा बताते हुए आरोप लगाया है कि गम्भीर अपराध में संलिप्त अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है जो कि गम्भीर चिंता का विषय है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि भाजपा सरकार में जब सत्ताधारी दल का जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा स्वतः ही लगाया जा सकता है।
पार्टी ने पत्र में लिखा है कि 30 अप्रैल 2026 को पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ प्रकरण में एक कथित अपराधी की मृत्यु के बाद अनेक तथ्यों एवं परिस्थितियों ने इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना दिया है। मुठभेड़ की परिस्थितियों एवं घटनाक्रम की सत्यता पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे आमजन में आक्रोश एवं अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो रही है। मुठभेड प्रकरण में पुलिस द्वारा निर्धारित मानकों (SOP) का पालन किया गया या नहीं? मुठभेड़ के दौरान स्वतंत्र एवं निष्पक्ष साक्ष्यों का भी अभाव दर्शाया गया है तथा प्रत्यक्षदर्शियों एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा मुठभेड की निष्पक्षता पर आशंका व्यक्त की जा रही है, कि क्या यह मुठभेड़ वास्तविक थी अथवा सुनियोजित कार्रवाई का परिणाम है?
कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन सर्वोपरि होता है तथा किसी भी प्रकार की फर्जी या संदिग्ध मुठभेड़ न केवल न्याय व्यवस्था को कमजोर करती है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी आघात पहुंचाती है। इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित कराया जाना अति आवश्यक है। अकरम एनकाउंटर प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (सेवानिवृत्त न्यायाधीश / स्वतंत्र एजेंसी) से कराई जाए तथा जांच की प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाया जाए।
6 मई 2026 को चम्पावत में एक 16 वर्षीय नाबालिग युवती के साथ समूहिक बलात्कार की घटना होती है तथा 7-8 मई 2026 के समाचार पत्रों में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस इस मामले में साजिश का खुलासा करती है, परन्तु कुछ ही घंटों के उपरान्त पूरे मामले में लीपापोती शुरू होती है तथा पुलिस अपनी ही जांच के बाद पूरे मामले को ही झूठा करार दे देती है। मामले में पीड़िता और उसके परिवार को प्रताड़ित / प्रलोभन दिये जाने की बात भी सामने आ रही है। यही नहीं पीडिता के साथ आवाज उठाने वाले व्यक्तियों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें प्रताडित किया जा रहा है।
पूरे प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस जांच निष्पक्ष नहीं है तथा किसी दबाव के चलते जल्दबाजी में लिया गया फैसला प्रतीत होती है। अपने ही खुलासे से मुकर जाने पर पुलिस जांच पर कई प्रकार के संदेह पैदा हो रहे हैं। चम्पावत प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराया जाना न्याय हित में अत्यंत आवश्यक है।
कांग्रेस का कहना है कि 2 मई 2026 को जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्राम रैतपुर, सतपुली क्षेत्र के एक युवक द्वारा कथित रूप से पुलिस प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या कर लेने का अत्यंत गंभीर एवं दुःखद मामला सामने आया। यह घटना न केवल मानवीय दृष्टि से पीड़ादायक है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था एवं पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने आन्दोलनरत नर्सिंग अभ्यर्थियों का मामला भी उठाया*
कांग्रेस ने कहा कि वर्तमान समय में देहरादून में नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लम्बे समय से आन्दोलनरत हैं। प्रदेश के हजारों प्रशिक्षित नर्सिंग अभ्यर्थियों में सरकार की नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पूर्व में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया वर्षवार (सीनियरिटी आधारित) प्रणाली के अनुसार संचालित होती थी, जिसमें पुराने एवं लंबे समय से प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती थी। किन्तु वर्तमान में सरकार द्वारा भर्ती परीक्षा प्रणाली लागू कर दिए जाने से वर्षों से तैयारी कर रहे तथा लंबे समय से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट उत्पन्न हो गया है।
आन्दोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि नई व्यवस्था के कारण अनुभव एवं प्रतीक्षा अवधि की अनदेखी हो रही है, जिससे हजारों युवाओं में निराशा एवं असुरक्षा की भावना बढ रही है। नर्सिंग जैसे संवेदनशील एवं सेवा आधारित क्षेत्र में कार्यरत युवाओं ने वर्षों तक प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने की आशा के साथ कठिन परिश्रम किया है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में अचानक परिवर्तन करना उन अभ्यर्थियों के हितों के विपरीत प्रतीत होता है, जो लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी आन्दोलनरत नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांगों का गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए निम्न बिंदुओं पर स्वास्थ्य महानिदेशक द्वारा भेजे गये प्रस्ताव के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्यवाही की मांग करती है. नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को पूर्व की भांति वर्षवार (सीनियरिटी आधारित) प्रणाली के अनुसार संचालित किया जाए। लंबे समय से प्रतीक्षारत पुराने अभ्यर्थियों को भर्ती में प्राथमिकता प्रदान की जाए।
नई भर्ती परीक्षा प्रणाली से प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा हेतु विशेष नीति बनाई जाए आन्दोलनरत अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता कर उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पडे नर्सिंग पदों पर शीघ्र नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएं
हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य एवं स्वास्थ्य सेवाओं के हित में आप सकारात्मक हस्तक्षेप कर स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखंड द्वारा भेजे गये प्रस्ताव के अनुरूप निर्णय लिये जाने हेतु राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे।
प्रतिनिधमंडल में गोदियाल व हरीश रावत के अलावा विधायक लखपत बुटोला, मीडिया कमेटी के अध्यक्ष राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, महानगर अध्यक्ष डा. जसविंदर गोगी, आंदोलनकारी वीरेंद्र पोखरियाल, सरदार गुरुचरण सिंह, ओमप्रकाश सती आदि मौजूद थे।

