
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा दंगे मे शामिल दो आरोपी जीशान परवेज उर्फ सेबू व महबूब आलम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। मामले मे निर्णय देते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ती पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने दोनों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिए है। यदि वे इस केस के अलावा किसी अन्य अपराध में शामिल न हो तो।
मामले के अनुसार अब्दुल मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित, झूठे सपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया। यही नही उनके द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। जब जिला प्रसाशन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुँची तो उनपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया। इसी दंगे में सरकारी कर्मचारी, पुलिस, सरकारी सम्पति व अन्य लोग घायल हो गए थे। कई लोगों की जान तक चली गयी थी। पुलिस ने दंगाईयो के खिलाफ आईपीसी की धारा 147,148, 149,307 395, 253, 233, 393, 341, 342, 353, 413,427,436,333 सहित कई धाराओं मे मुकदमा दर्ज किया था।
दंगे में शामिल दोनों आरोपियों को पुलिस ने 8 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। हल्द्वानी कोर्ट के द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायधीश ने उनके मामले पर सुनवाई करते हुए 20 मार्च 2025 को सजा सुनाई। इस आदेश के खिलाफ उनके द्वारा उच्च न्यायलय मे अपील दायर की गयी । उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मामलो की सुनवाई के बाद उन्हें जमानत पर रिहा करने आदेश दे दिए हैं। जबकि अभी मुख्य आरोपी साजिस कर्ता अब्दुल मलिक को कोर्ट से कोई राहत नही मिली है।
आरोपियो का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नही है। पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए जायँ । जमानत का विरोध करते हुए सरकार ने कहा कि ये घटना के समय ये वहाँ मौजूद थे। इनके द्वारा पथराव, सरकारी सम्पति को नुकसान पहुचाने के साथ साथ आगजनी, पथराव व गोलाबारी की। इसलिए इनकी जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त किया जाय। इसके जवाब में आरोपियों की तरफ से कहा गया कि दंगे में सामील दर्जनों लोगो को पूर्व में कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। उसी के आधार पर उन्हें भी जमानत पर रिहा किया जाय।

