
– ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी के बाद भी उड़ान पर उठे सवाल
पहाड़ का सच चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत 6 लोग सवार थे। यह हेलीकॉप्टर (ट्रांस भारत एविएशन द्वारा संचालित, मॉडल VT-HCX) बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर देहरादून/फाटा की ओर लौट रहा था। ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी के बाद भी उड़ान पर सवाल उठ रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार को दोपहर सवा दो बजे के करीब हेलीकॉप्टर का संपर्क जोशीमठ क्षेत्र में मारवाड़ी के पास चाई गांव की पहाड़ी (हाथी पहाड़ के पीछे) के पास अचानक टूट गया, जिसके बाद वहां धुआं उठता देखा गया।
बताया जा रहा है किया पायलट का नाम हिमांशु था और यात्रियों की पहचान चंद्रकांत, राजश्री, दिनेश, आकाश और अथर्व के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश, बर्फबारी और खराब दृश्यता को इस हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना और SDRF की टीमें तुरंत मौके के लिए रवाना कर दी गई हैं। खराब मौसम की वजह से शुरुआत में रेस्क्यू टीमों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उत्तराखंड की पहाड़ियों में होने वाले हेलीकॉप्टर हादसों को लेकर AAIB ने हाल ही में (13 अक्टूबर 2026) एक बेहद महत्वपूर्ण फाइनल रिपोर्ट जारी की है, जो इस क्षेत्र में उड़ानों की सुरक्षा और जोखिमों को समझने के लिए सबसे सटीक दस्तावेज है:
केदारनाथ-गौरिकुंड हेलीकॉप्टर क्रैश पर हालिया AAIB रिपोर्ट (अक्टूबर 2026)
यह रिपोर्ट पिछले वर्ष घाटी में क्रैश हुए आर्यन एविएशन के बेल 407 हेलीकॉप्टर (VT-BKA) की विस्तृत जांच के बाद जारी की गई है, जिसमें 7 लोगों की मौत हुई थी। इस रिपोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं, जो पहाड़ी इलाकों में उड़ानों के खतरों को उजागर करती हैं:
• खराब मौसम में उड़ान जारी रखना: रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना का मुख्य कारण तेजी से नीचे उतरते बादल (Descending Clouds) और खराब दृश्यता (Low Visibility) के बावजूद उसी रूट और ऊंचाई पर उड़ान जारी रखने का पायलट का निर्णय था।
• सीमित अनुभव (Limited Valley Experience): जांच में पाया गया कि पायलट को उस विशिष्ट संकरी घाटी (Valley) में उड़ान भरने का पर्याप्त अनुभव नहीं था। खराब विजिबिलिटी के कारण विजुअल रेफरेंस (सामने दिखने वाले पहाड़ व रास्ते) खो जाने से हेलीकॉप्टर सीधे पहाड़ी से टकरा गया, जिसे विमानन की भाषा में कंट्रोल फ्लाइट इनटू टेरेन (CFIT) कहा जाता है।
• तकनीकी खराबी नहीं: AAIB को जांच में हेलीकॉप्टर के इंजन या सिस्टम में कोई भी तकनीकी खराबी (Technical Defect) नहीं मिली थी।
• मौसम की सटीक जानकारी का अभाव: रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर मौसम की पल-पल की सटीक जानकारी (Local Weather Information) देने वाले सिस्टम में कमियां पाई गईं।
सुरक्षा के लिए AAIB की सख्त सिफारिशें
इस हालिया रिपोर्ट के आधार पर AAIB ने उड्डयन नियामक DGCA को भविष्य के लिए सख्त निर्देश दिए हैं:
1. हिल-फ्लाइंग ट्रेनिंग: घाटी में अकेले (Single-Pilot) कमर्शियल उड़ान शुरू करने से पहले पायलट के पास किसी अनुभवी पायलट की देखरेख में कम से कम 50 घंटे की पहाड़ी उड़ान (Hill-Flying) का अनुभव होना अनिवार्य किया जाए।
2. कंट्रोल सेंटर की निगरानी: उड़ान नियंत्रण केंद्रों (जैसे सीतापुर कंट्रोल सेंटर) की निगरानी सीधे DGCA करे और सभी रेडियो संचार (Radio Communications) को रिकॉर्ड करना अनिवार्य हो।
जोशीमठ से उप निरीक्षक मनोहर कन्याल द्वारा बताया गया कि एसडीएम जोशीमठ द्वारा समय 14:21 बजे सूचना प्राप्त हुई कि जोशीमठ क्षेत्र के चाईं गांव के ऊपर एक हेली के क्रैश लैंडिंग की सूचना है।
इस संबंध में यूकाडा कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि चाईं गांव के ऊपर आर्मी कैंप के पास ट्रांस भारत हेली की लोकेशन दिख रही है, जो बद्रीनाथ से सहस्त्रधारा के लिए आ रहा था।
जिसमें 05 पैसेंजर और 01 पायलट सवार है, अभी क्रैश और क्रैश लैंडिंग की पूर्ण जानकारी नहीं है।
एसडीआरएफ की जोशीमठ टीम और पांडुकेश्वर की टीम समय 14:24 बजे घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है।


