
– महिला अपराधों पर कांग्रेस का राजनीति पाखंड और दोगला चरित्र हुआ उजागर : मुन्ना चौहान
-कांग्रेस की हर साजिश होगी बेनकाब: विनोद चमोली
पहाड़ का सच देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में तथाकथित वीआईपी भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर हमलावर हुई कांग्रेस के आरोपों का जबाव देने के लिए भाजपा ने दो तेज तर्रार प्रवक्ता/विधायक मैदान में उतारे हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस झूठ फैला रही है जिसका पर्दाफाश जल्द हो जाएगा।

शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार ने इसमें इंसाफ सुनिश्चित कराया है और सीबीआई जांच में भी पूरा सच सामने आएगा, लिहाजा कांग्रेस को जनता देवभूमि की छवि खराब करने की साजिश का जबाव देगी। चौहान ने कहा कि कांग्रेस बताए वो कब तक अपने यौन शोषण के आरोपी सांसद पर कार्रवाई करेगी? उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस, दुखद अंकिता मर्डर प्रकरण को लेकर बहुत ही घृणित राजनीति कर रही है। क्योंकि ऐसी कोई भी कार्रवाई जो इस पूरी दुर्भाग्यपूर्ण घटना में की जा सकती थी, वह सरकार द्वारा की गयी है। 24 घंटे में आरोपियों को जेल भेजा गया, फिर एसआईटी जांच से जुटाए सबूतों और मजबूत पैरवी ने दोबारा उन्हें बाहर नहीं आने दिया। बहुत कम समय न्यायालय के माध्यम से आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनिश्चित करवाई गई।
कोई ऐसा अवसर नहीं जब पीड़ित परिजनों का सुझाव न लिया गया हो। उनके आग्रह पर ही तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदला गया और सजा मिलने के बाद भी अब सीबीआई जांच शुरू की गई है। स्वयं उच्च न्यायलय ने भी जांच प्रक्रिया और सरकार के प्रयासों पर संतुष्टि जाहिर की गई थी। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया में पूर्णतया पारदर्शिता और तत्परता से, बिना अपने पराए का भेद कर, दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई गई। प्रभावित परिजनों की भी सरकार द्वारा यथोचित आर्थिक एवं रोजगार संबंधी मदद की गई।
प्रदेश की जनता, मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर बेटी को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर पूरी तरह संतुष्ट है जिसके चलते ही, कांग्रेस द्वारा फैलाये प्रोपेगेंडा को नकारते हुए, लगातार चुनावों में जनता ने भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया है। वावजूद इसके कांग्रेस नेताओं ने इस संवेदनशील मुद्दे पर झूठ और भ्रम परोसना नहीं छोड़ा है। एक बार फिर कांग्रेस पीड़ित परिजनों की भावनाओं पर घृणित राजनीति कर रही है। जबकि दिवंगत बेटी के माता पिता से मिलकर सीबीआई उच्च अधिकारियों ने शीघ्र जांच पूरी करने का भरोसा दिया है। वहीं जांच एजेंसियों द्वारा पहले भी अनुरोध किया गया था कि किसी के पास सबूत है तो पेश करें और आज भी पुख्ता सबूत पेश करने का अवसर कांग्रेस के पास भी है। लेकिन अफसोस इसके उलट कांग्रेस इसे विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत राजनैतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कांग्रेस पर पाखंडी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि जो राहुल गांधी और कांग्रेसी दिल्ली से लेकर देहरादून तक घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, उनकी अब तक जुबान तक नहीं खुली है अपने यौन शोषण के आरोपी सांसद की आलोचना में। एक नहीं बल्कि 11-11 बच्चियों ने उनके प्रोफेसर सांसद पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं और यह आरोप जांच के बाद सही भी पाए गए। जेएनयू प्रशासन ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया लेकिन कांग्रेस नेतृत्व के कानों में जून तक नहीं रेंगी और कार्रवाई तो दूर लगातार उन्हें बचाने के प्रयास जारी है।

बेबुनियाद आरोपों की राजनीति कर रही कांग्रेस, तथ्यों और समाधानों पर मौन: विनोद चमोली
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं धर्मपुर से विधायक विनोद चमोली ने कांग्रेस के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों को एक साथ जोड़कर राजनीतिक माहौल बनाने से कांग्रेस की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। कांग्रेस जिन मामलों को लेकर सवाल उठा रही है, उन पर उसे अपना स्पष्ट दृष्टिकोण और समाधान भी सामने रखना चाहिए। केवल आरोप लगाना और जनता के बीच भ्रम पैदा करना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं हो सकती।
उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कहा कि कांग्रेस स्पष्ट करे कि वह किन मामलों, दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर सरकार पर सवाल उठा रही है। आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए ठोस आधार आवश्यक है। विपक्ष को सरकार की नीतियों और फैसलों से असहमति जताने का अधिकार है, लेकिन हर प्रशासनिक निर्णय को भ्रष्टाचार से जोड़ना उचित नहीं है। जनता को आरोपों की राजनीति नहीं, तथ्यों पर आधारित जवाब चाहिए।
चमोली ने भूमि कानून के मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस को प्रदेश में लागू प्रावधानों और उनके उद्देश्यों पर बात करनी चाहिए। राज्य सरकार ने भूमि की खरीद-बिक्री को लेकर सख्त व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत पर्वतीय जिलों में बाहरी लोगों के कृषि और उद्यान भूमि खरीदने पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान किए गए हैं। कांग्रेस बताए कि वर्तमान व्यवस्था में उसे कौन-सी ठोस कमी नजर आती है और उसका विकल्प क्या है। केवल आशंकाएं पैदा करने से प्रदेश के हितों की रक्षा नहीं होगी।
खनन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर चमोली ने कहा कि खनन से मिलने वाले राजस्व, अवैध खनन पर कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल पूछे जा सकते हैं, लेकिन बिना किसी विशिष्ट मामले और प्रमाण के पूरे तंत्र पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यदि कांग्रेस के पास अनियमितता से जुड़े तथ्य हैं, तो उन्हें सामने रखकर जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने से वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं निकलता।
रोजगार और भर्ती परीक्षाओं पर उन्होंने कहा कि धामी सरकार के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून भी बनाया गया है। उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम में दोषियों के लिए कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। भर्ती प्रक्रिया में जहां भी अनियमितता हो, वहां कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उसके पास क्या ठोस सुझाव हैं।
चमोली ने कहा कि पलायन उत्तराखंड के लिए गंभीर विषय है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन केवल चिंता जताने के बजाय रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे उपायों पर ठोस चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस बताए कि पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने और गांवों को आबाद रखने के लिए उसके पास क्या व्यावहारिक योजना है। जनता को समस्याएं गिनाने के साथ-साथ समाधान भी चाहिए।


