
– दुष्यंत गौतम की ताजपोशी के बाद उत्तराखंड से दिल्ली तक हंगामा,सिक्किम विवि छात्र संगठन ने उठाए सवाल
पहाड़ का सच गंगटोक/देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीवीआईपी मामले की गूंज अब सिक्किम तक पहुंच गई है। सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संगठन (SUSA) ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
सोशल मीडिया में वॉयरल पत्र के अनुसार संगठन ने कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों और सार्वजनिक स्तर पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच तथा जांच की स्थिति स्पष्ट होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संगठन ने सिक्किम सरकार और आम लोगों का ध्यान इस नियुक्ति की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की पृष्ठभूमि, सार्वजनिक रिकॉर्ड और उनसे जुड़ी परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
संगठन के अनुसार, लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। विज्ञप्ति में वर्ष 2022 में उत्तराखंड में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस मामले में कथित वीवीआईपी की पहचान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अंकिता वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। उनकी हत्या के चार दिन बाद नहर से उनका शव बरामद हुआ था।
संगठन ने उर्मिला सनावर के उन कथित ऑडियो क्लिप का भी उल्लेख किया है, जिनमें दुष्यंत कुमार गौतम को इस मामले से जुड़े कथित अज्ञात वीवीआईपी के रूप में आरोपित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, विज्ञप्ति स्पष्ट करती है कि ये आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं। गौतम इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं और मानहानि की कार्यवाही भी शुरू की है। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
संगठन ने अंकिता के परिवार की ओर से कथित वीवीआईपी की पहचान और संबंधित कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की उपलब्धता को लेकर उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया है। संगठन ने कहा कि कथित वीवीआईपी से जुड़े पहलू की जांच और सीबीआई जांच को लेकर सामने आ रही चर्चाओं के बीच पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विज्ञप्ति में सक्षम अधिकारियों से अपील की गई है कि संबंधित आरोपों की गहन और निष्पक्ष जांच की जाए तथा जांच की स्थिति स्पष्ट होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए। संगठन ने कहा कि उसकी मांग न्याय, पारदर्शिता, विधिसम्मत प्रक्रिया और कानून के शासन के सिद्धांतों पर आधारित है।
दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर 2026 को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा हुई थी। इस नियुक्ति के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीवीआईपी प्रकरण को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का दायरा बढ़ने लगा है। सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संगठन की यह मांग इस मुद्दे को उत्तराखंड से बाहर भी चर्चा में लाने वाला घटनाक्रम है।
चार साल बाद फिर गरमाया मामला
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को मई 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, कथित वीवीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे।
फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की। दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद विवाद फिर तेज हो गया। 14 अक्टूबर को अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना दिया, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुए। इस धरने को देश की।प्रमुख समाचार एजेंसियों , चैनलों और अखबारों ने प्रमुखता से कवर किया।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन के दौरान अंकिता के माता-पिता को 15 अक्टूबर की सुबह 4 बजे हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। परिवार की मांग है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
(कथित वीवीआईपी के रूप में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने संबंधी आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं। गौतम इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं। समाचार में आरोपों और प्रमाणित न्यायिक तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना भी जरूरी है। सिक्किम विवि छात्र संगठन के वॉयरल पत्र की पुष्टि होनी बाकी है।


