
धामी सरकार ने राजस्व से अधिक तरजीह जनस्वास्थ्य को दी
एक साल तक निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री नहीं हो पाएगी
राज्य को लगभग 40 करोड़ राजस्व का नुकसान, नशे का अवैध कारोबार बंद होगा
पहाड़ का सच देहरादून। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राज्य में तम्बाकू, निकोटीन युक्त गुटका और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर अगले एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश आज से ही लागू हो गया है।
सरकार के इस बड़े फैसले से राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य में सुधार की उम्मीद है, लेकिन साथ ही सरकारी राजस्व और स्थानीय व्यापार पर भी इसका सीधा असर पड़ने जा रहा है। एक मोटे अनुमान के हिसाब से राज्य में प्रतिबंध के कारण उत्तराखंड सरकार को सीधे तौर पर अपने हिस्से के ₹20 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना होगा। हालांकि, धामी सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई पीढ़ी को नशे से बचाने और जनता की सेहत की रक्षा करने के लिए यह राजस्व की बलि देने जैसा कदम जरूरी था।
इस प्रतिबंध का असर केवल बड़े निर्माताओं और थोक डीलरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी पूरी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) प्रभावित होगी। राज्य के हजारों छोटे खुदरा दुकानदार, पान की गुमटी चलाने वाले और रेहड़ी-पटरी विक्रेता, जिनकी आजीविका का एक बड़ा हिस्सा गुटका और पान मसाला बेचने से चलता है, उनके दैनिक रोजगार और आय पर भारी संकट खड़ा हो गया है।
अतीत में अन्य राज्यों के अनुभवों को देखें तो पूर्ण प्रतिबंध के बाद इन उत्पादों की पड़ोसी राज्यों से तस्करी और अवैध बिक्री (ब्लैक मार्केटिंग) का जोखिम बढ़ जाता है। यदि बाजार में इसकी अवैध बिक्री जारी रहती है, तो सरकार को कर का नुकसान तो होगा ही, साथ ही कानून व्यवस्था और प्रवर्तन (Enforcement) विभागों पर निगरानी का खर्च भी बढ़ेगा।


