
शारदा कॉरिडोर और पूर्णागिरि रोपवे पर चर्चा होने की संभावना
युवाओं के लिए की जा सकती हैं अहम घोषणाएं
पहाड़ का सच चंपावत। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अपनी कैबिनेट बैठक को राजधानी देहरादून से बाहर सीमांत क्षेत्रों में ले जाने का एक बड़ा फैसला लिया है। इसी कड़ी में रविवार चार अक्टूबर को सुबह 11 बजे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी (NHPC) परिसर में राज्य मंत्रिमंडल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। बैठक में बड़ी परियोजनाओं पर गहन चर्चा के अलावा युवाओं के विकास से जुड़ी अहम घोषणाएं हो सकती हैं। सीएम, कैबिनेट के सहयोगी और अधिकारी शनिवार को बनबसा पहुंच चुके हैं।

चंपावत जिले के इतिहास में यह पहली बार है जब प्रदेश की कैबिनेट बैठक यहां आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस क्षेत्र (चंपावत) के विधायक भी हैं।
जानकारी के अनुसार 4 अक्टूबर 2026, सुबह 11बजे, एनएचपीसी प्रशासनिक भवन (प्रथम तल), बनबसा, चंपावत में बैठक आयोजित की गई है। जिलाधिकारी मनीष कुमार और पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बैठक, सुरक्षा और रूट प्लान से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। खराब मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी बनाई गई है।
सूत्रों की जानकारी है कि बैठक में प्रदेश स्तर के कई महत्वपूर्ण नीतिगत प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है। सीमावर्ती और कुमाऊं क्षेत्र के विकास के लिए शारदा कॉरिडोर और पूर्णागिरि रोपवे जैसी बड़ी परियोजनाओं पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। कयास लगाए जा रहे हैं कि धामी सरकार युवाओं को रोजगार से जुड़े अवसर और सभी सरकारी इंटर कॉलेजों के 10वीं व 12वीं के छात्रों को मुफ्त टैबलेट देने का बड़ा फैसला ले सकती है।
• अन्य विभाग: स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन और पर्यटन विभागों से जुड़े नीतिगत प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है।
देहरादून के वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर नेपाल सीमा से सटे सीमांत जिले चंपावत में पूरी सरकार का जुटना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और रणनीतिक मायने हैं। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार अब पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के माध्यम से धामी सरकार सुदूर क्षेत्रों और सीमांत जनता को सीधे विकास का समदर्शी संदेश देना चाहती है। चंपावत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गृह जिला और खुद का विधानसभा क्षेत्र है। अपने ही क्षेत्र में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित करवाकर सीएम धामी स्थानीय जनता के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं।
साथ ही यह संदेश दे रहे हैं कि उनके नेतृत्व में कुमाऊं और सीमांत क्षेत्रों की उपेक्षा नहीं हो रही है। धामी सरकार की यह रणनीति रही है कि विकास को राज्य के आखिरी कोने तक पहुँचाया जाए। चीन और नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड के सीमांत जिलों में पलायन एक बहुत बड़ी समस्या है। बनबसा (जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है) में कैबिनेट करके सरकार यह जताना चाहती है कि सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और वहां रहने वाले लोग उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं।
उत्तराखंड की राजनीति हमेशा से गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के क्षेत्रीय संतुलन के इर्द-गिर्द घूमती है। गैरसैंण (गढ़वाल) में अक्सर सत्र या बैठकें होती रही हैं। ऐसे में चंपावत (कुमाऊं) में कैबिनेट बैठक करके धामी सरकार ने दोनों मंडलों के बीच एक राजनीतिक और विकासपरक संतुलन साधने का प्रयास किया है।
इस बैठक को लेकर राज्य में सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित विपक्ष के अन्य नेताओं ने इस बैठक पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चाहे जहाँ भी कैबिनेट बैठक करे, लेकिन उसे पहले यह जवाब देना चाहिए कि प्रदेश के संसाधनों से आम जनता को क्या मिला? विपक्ष ने अंकिता भंडारी मामले, भर्ती घोटालों और स्थानीय स्तर पर छीने जा रहे रोजगार जैसे मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश तेज कर दी है।


