पहाड़ का सच/एजेंसी।

लखनऊ। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी एनालॉग और मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है।
राज्य सरकार ने प्रदेश भर में हानिकारक रसायनों और विजातीय वसा (फॉरेन फैट) से तैयार किए जाने वाले नकली दुग्ध उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए हैं।इसके तहत यदि किसी डेयरी या निर्माण इकाई में दूध, पनीर, खोया, घी, क्रीम या अन्य उत्पादों में हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, तो मौके पर मौजूद पूरे स्टॉक को तुरंत जब्त कर नष्ट कर दिया जाएगा।
पूर्व में की गई जांच और प्रवर्तन अभियानों के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से लिए गए सैंपलों में मिलावट और खतरनाक रसायनों की पुष्टि हुई है। जांच में सामने आया है कि कई विनिर्माण इकाइयों में सस्ते और स्वास्थ्य के लिए घातक घटकों का प्रयोग किया जा रहा था।
जिनमें शामिल हैं – रिफाइंड तेल, सोयाबीन उत्पाद और विजातीय वसा, डिटर्जेंट, टेल्कम पाउडर और टाइटेनियम डाईऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपाल, टीनोपाल, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और विभिन्न न्यूट्रलाइजर्स।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए इन घातक और गुणवत्ताहीन रसायनों के प्रयोग पर रोक लगाना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
नए निर्देशों के तहत मिलावटी दुग्ध उत्पाद बनाने या बेचने वालों के खिलाफ निम्नलिखित सख्त कदम उठाए जाएंगे:
स्टॉक की जब्ती व विनष्टीकरण: परिसर में पाए जाने वाले सभी संदेहास्पद और हानिकारक दुग्ध उत्पादों को तुरंत नष्ट कराया जाएगा।
निर्माण पर तत्काल रोक: खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 34 के तहत आपातकालीन प्रतिबंध आदेश जारी कर संबंधित प्रतिष्ठान में उत्पादन का काम तुरंत बंद कराया जाएगा।
एफआईआर व लाइसेंस निलंबन: दोषी पाए जाने पर संबंधित पक्ष के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिया जाएगा।
ब्रांड पर प्रदेशव्यापी बैन: यदि राज्य के बाहर से आने वाले या स्थानीय रूप से निर्मित किसी विशिष्ट ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की पुष्टि होती है, तो उस पूरे ब्रांड की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
