
पहाड़ का सच नई दिल्ली/देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा दो आरोपियों जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को दी गई ‘डिफॉल्ट जमानत’ रद्द कर दी है।
कोर्ट ने जांच में लापरवाही के हाईकोर्ट के निष्कर्ष को गलत बताते हुए इसे बेहद तत्परता से की गई जांच माना और आरोपियों को दो हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिए। उपरोक्त मामले में 4 मई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के तथ्यों को गलत समझा और आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत (Default Bail) रद्द कर दी। कोर्ट ने नोट किया कि 90 दिनों के भीतर 65 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जो जांच की त्वरित गति को दर्शाता है, न कि लापरवाही को।

कोर्ट का कहना है कि आरोपियों ने जांच अवधि विस्तार को समय पर चुनौती नहीं दी, जिसके कारण उन्होंने डिफॉल्ट जमानत का अधिकार खो दिया। दोनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।

आरोपियों को गुण-दोष के आधार पर नियमित जमानत मांगने की स्वतंत्रता दी गई है। यह फैसला उत्तराखंड सरकार के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह पुलिस पर हमले और व्यापक हिंसा से जुड़ा एक गंभीर मामला था।

