
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून। राजनीति में फल केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलने और सियासी दूरियां कम करने के लिए एक “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” या “फ्रूट डिप्लोमेसी” का जरिया है।

फलों का आदान-प्रदान, दो परिवारों से लेकर समूह के बीच की कड़वाहट को कम करने में मदद करता है। इसी कड़ी में फल भेजना, एक अनौपचारिक, नरम और मैत्रीपूर्ण संदेश का द्योतक भी होता है।
फल केवल खाने की वस्तु नहीं, बल्कि कूटनीतिक संवाद का एक टूल भी माना जाता है। यह संबंधों को मजबूत करने की एक सुसंस्कृत परंपरा है जिसका पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लंबे समय से निर्वहन करते आ रहे हैं।

हरीश रावत राजनीतिक व्यक्ति हैं और ऐसे आयोजनों के पीछे का मकसद राजनीतिक नफे के हिसाब से भी देखा जाए तो कोई अनहोनी बात नहीं है। शुक्रवार को पूर्व सीएम की अपने आवास पर ” समर सेलिब्रेट” किया। इस आयोजन में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें वे चेहरे भी शामिल थे जो 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
हरीश रावत ने सभी को तरबूज, खरबूज का स्वाद चखाया। आपसी संवाद के दौरान स्थानीय मुद्दों व लोकल पॉलिटिक्स की बातों से हटकर रावत ने मीडिया के साथियों से देश की पॉलिटिक्स के कुछ मुद्दों पर कहा कि नारी शक्ति बंधन अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए, हम इसका स्वागत करते हैं लेकिन परिसीमन को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं उसे सर्वंदलीय बैठक में दूर किया जाए।
यह फल पार्टी पहली बार नहीं, हरीश रावत पहले भी इस तरह के आयोजनों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और आम जनता से जुड़ने की कोशिश करते रहे हैं। माल्टा पार्टी के जरिए वह खूब सुर्खियों में रहते हैं। इस आयोजन के जरिए वह एक बार फिर अपनी सक्रियता का संकेत दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं से नजदीकी का सबल दिखाकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ही स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर परोक्ष रूप से कहने की कोशिश कर रहे हैं कि पार्टी में उनकी अहमियत कम नहीं हुई है।
दोपहर साढ़े बारह बजे से दो बजे समर सेलिब्रेट में सादगी व आत्मीयता के साथ पहाड़ी व्यंजनों का खूबसूरत संगम देखने को मिला। अतिथियों का वैलकम ठंडे और ताजगी से भरपूर बुरांश और पहाड़ी नींबू के जूस से हुआ। इसके बाद खीरा, तरबूज और खरबूज जैसे मौसमी फलों की पेशकश ने आयोजन को और खास बना दिया। ताजगी व स्वाद से भरपूर फलों का मेहमानों ने खूब लुत्फ उठाया।
दोपहर के भोजन में कत्यूर घाटी के भट की चुड़कानी, उत्तरकाशी के लाल चावलों का भात, डीडीहाट के मडुवे की रोटी, जौनसार के लाल टमाटरों की चटनी और पहाड़ी आलू का झोल मेहमानों के लिए खास आकर्षण रहे। कुछ अतिथियों के लिए पूरी-चटनी की भी व्यवस्था की गई, जिससे हर किसी की पसंद का ध्यान रखा गया।
रावत ने कहा कि अब वक्त बदल गया है, लेकिन उनका लगाव वही है, अब वे पहाड़ी व्यंजनों और फलों को सौगात मानकर लोगों को खिलाते हैं। हरीश रावत का कहना है कि ककड़ी, खीरा और तरबूज जैसे फल सिर्फ स्वाद ही नहीं देते, बल्कि ये मौसम की खास देन भी हैं, जिन्हें सबके साथ मिलकर बांटने का अलग ही आनंद है। बिना किसी औपचारिकता के सहज और आत्मीय माहौल में सभी ने बातचीत, हंसी-मजाक और स्वादिष्ट व्यंजनों का भरपूर लुत्फ उठाया। यही सादगी और अपनापन इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी रही।
कार्यक्रम के अंत में स्वीट डिश के रूप में सभी ने हरिद्वार के गुड़ का स्वाद चखा जिससे इस आयोजन का मिठास भरा समापन हुआ। इसी के साथ मेहमानों को गुड बाय।
