
पहाड़ का सच देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि गौरीकुंड केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चलने वाले घोड़ा- खच्चरों के बीमा की 80 प्रतिशत राशि यात्रा व्यवस्था खाते से दी जानी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में जिला अधिकारी रुद्रप्रयाग को पत्र लिखा।

रुद्रप्रयाग जिले में यात्रा व्यवस्था खाते का संचालन जिला अधिकारी के निर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी और पर्यटन अधिकारी करते हैं। आर्य ने पत्र में कहा कि केदारनाथ यात्रा में गौरीकुण्ड से लेकर केदारनाथ के बीच 5000 खच्चरों के लाइसैंस बनते हैं। इस साल यात्रा मार्ग में चलने वाले घोड़ों और खच्चरों का लाइसैंस बनाने से पहले उनका बीमा करवाना आवश्यक है। वर्ष 2025 तक यात्रा में घोड़ा – खच्चरों का बीमा करने हेतु पड़ने वाली राशि का 80 प्रतिशत धन सरकार अनुदान के रुप में देती थी।
उन्होंने बताया कि पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने अवगत कराया है कि इस योजना के बंद होने से दो सालों से यह अनुदान नहीं मिल पा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गत 10 सालों से खच्चरों से लिए जाने वाले शुल्क से इकट्ठा रुपया 40 करोड़ 15 लाख 50 हजार 100 रुपया धनराशि यात्रा व्यवस्था खाते में जमा हुई है।
उन्होंने कहा कि, घोड़ा-खच्चरों से प्राप्त राजस्व के खाते से लगभग 36 करोड़ 59 लाख 85 हजार 385 रुपए के लगभग खर्च कर दिया गया है। .यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि इस धनराशि में से बहुत कम धनराशि घोड़ा-खच्चरों से संबधित कार्यों में खर्च हुई है। इस साल 5000 खच्चरों को यदि बीमा हेतु दी जाने वाली राशि का 80 प्रतिशत अनुदान घोड़ा-खच्चर संचालकों द्वारा जमा किए यात्रा व्यवस्था खाते से दिया जाय तो केवल 1 करोड़ 40 लाख रुपए की आवश्यकता होगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गत 10 सालों में घोड़ा-खच्चर संचालकों का केदारनाथ यात्रा के संचालन हेतु आवश्यक राजस्व जमा करने में सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को बताया कि, इस योगदान को देखते हुए इस साल घोड़ा-खच्चरों के बीमा हेतु जमा की जा रही धनराशि का 80 प्रतिशत अनुदान की धनराशि यात्रा व्यवस्था खाते से देनी चाहिए।
