
पहाड़ का सच/एजेंसी।
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र के गांव मोरना में सोमवार को दलित किसान रामप्रसाद (60) की दो बेटियों ने टोका-टोकी से नाराज होकर अपने पिता की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में पता चला है कि बहनों के निशाने पर उसका बड़ा भाई भी था। अगर वारदात के समय वह सामने आ गया होता तो उस पर भी हमला हो सकता था।
बताया जा रहा है कि पिता राम प्रसाद पुराने ख्यालात के थे। वह लड़कियों के मोबाइल फोन यूज करने और कपड़ों को लेकर सख्त मिजाजी से पेश आते थे। दोनों बहनें पिता से छिपकर मोबाइल फोन चलाया करती थीं। वे रील देखने की बहुत शौकीन थीं। पिता की पाबंदियों के कारण उनकी नफरत बढ़ती गई और एक दिन दोनों ने खूनी वारदात को अंजाम दे दिया। पिता बेटियों को मोहल्ले, रिश्तेदारों या परिवार के फंक्शनों में भी भेजने से परहेज करते थे।
32 साल की आरोपी बहन कोमल ने पुलिस को बताया कि अभी तक उसकी शादी पिता ने नहीं की थी। पिता बेटे और बेटी में बहुत अंतर किया करते थे। वारदात को अंजाम देने से पहले दोनों बहनों ने पिता रामप्रसाद, मां चंद्रकली, भाई अमित और सुमित की खीर में नींद की गोली मिला दी थी। इसके बाद परिवार बेसुध हो गया था। तड़के तीन बजे दोनों उठीं और घर में रखे चाकुओं से पिता पर वार कर दिया। हत्या के बाद बहनों ने खून से सने अपने कपड़े बदल लिए थे। मौके पर पड़े खून के कपड़ों और दुपट्टों को साफ किया। उन्होंने कपड़ों को एक पोटली में बांधकर भूसा रखने के कमरे में छिपा दिया था। चाकुओं को भी दूसरे कमरे में छिपा दिया था।
इस हत्याकांड में मनोचिकित्सकों ने आशंका जताई है कि यह घटना भावनात्मक शोषण से तंग आकर अंजाम दिया गया होगा। ऐसी घटना के पीछे अवसाद, चिंता या व्यक्तित्व विकार जैसे मानसिक विकार हो सकते हैं। इन विकारों ने उन्हें भावनात्मक शोषण के लिए प्रेरित किया होगा। शायद उन्होंने अपने पित के हाथों भावनात्मक शोषण का सामना किया होगा।

