
देहरादून। देहरादून में सहस्रधारा रोड स्थित पॉश कही जाने वाली एटीएस कॉलोनी में आवासीय समिति के अध्यक्ष अजय सिंह के साथ अभद्रता और मारपीट करने के मामले में पुलिस ने आखिरकार बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर मुकदमा दर्ज किया है। समिति के अध्यक्ष, अन्य निवासियों की शिकायत और वायरल हो रहे वीडियो का संज्ञान लेकर बिल्डर और उनके साथी के विरुद्ध रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने शुक्रवार देर रात एटीएस कॉलोनी के अध्यक्ष अजय सिंह का न सिर्फ रास्ता रोका, बल्कि उन पर हमला भी कर दिया। वहीं, अध्यक्ष के विरुद्ध बेहद ही अशोभनीय और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इन सबकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई। वीडियो में इतनी गंदी भाषा का प्रयोग किया गया है, जो कि एक सभ्य इंसान न तो बोल सकता है और न ही सुन सकता है। क्या उत्तराखंड में इस तरह के बदमाशों को शह दी जा रही है। क्योंकि स्थानीय निवासियों ने पुलिस पर भी बिल्डर से मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि जब हेल्पलाइन नंबर 112 पर कॉल किया तो कॉलोनी में पहुंची पुलिस उल्टा अध्यक्ष और उनके परिवार को ही धमकाने लगी थी। घटना के बाद सवाल उठने लगे थे कि पुलिस की यह छवि मित्र पुलिस की अवधारणा के पूरी तरह विपरीत है। क्योंकि, शिकायत पर आई पुलिस ने पीड़ितों का कोई साथ मौके पर नहीं दिया था। जबकि बिल्डर और उनके अन्य साथी की गुंडागर्दी के वीडियो सोशल और डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म पर तेजी से वायरल होने लगे थे। वहीं, एटीएस कॉलोनी के निवासियों ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचकर भी घटना की शिकायत दर्ज कराई थी।
जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया और रायपुर पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। एसएसपी के निर्देशों के क्रम में बिल्डर और एक अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर दी गई।
बताते चलें कि पुनीत अग्रवाल वही बिल्डर हैं, जिन्होंने दीपावली पर पटाखे जलाने पर बच्चों पर पिस्टल तान दी थी। तब डीएम देहरादून ने बिल्डर का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इन्होंने नगर निगम की भूमि भी कब्जाई थी। तमाम जतन और शिकायतों के बाद निगम ने अपनी भूमि बिल्डर से छुड़ाई। इनका अवैध निर्माण का प्रकरण एमडीडीए में लंबित चल रहा है।
अब सबसे बड़ी देखने वाली बात है कि पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद क्या कार्रवाई करती है। अब इस शांत रहने वाले शहर में बाहरी लोगों के आने से कहीं न कहीं आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
