
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 14 मार्च 2026*
🌤️ *दिन – शनिवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – वसंत ऋतु*
⛅ *अमांत – 30 गते फाल्गुन मास प्रविष्टि*
⛅ *राष्ट्रीय तिथि – 22 फाल्गुन मास*
🌤️ *मास – चैत्र (गुजरात-महाराष्ट्र-फाल्गुन)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी सुबह 08:10 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तराषाढा 15 मार्च प्रातः 04:49 तक तत्पश्चात श्रवण*
🌤️ *योग – वरीयान सुबह 10:43 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️*राहुकाल – सुबह 09:29 से सुबह 10:58 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:29*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:24*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – ब्रह्म पुराण’ के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- ‘मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।’ (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय।’ का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण’)*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुर)
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
*पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा सभी पापो का होगा नाश और पुण्यो की होगी अपार वृद्धि*
🌷 *षडशीति-मीन संक्रान्ती* 🌷
👉 *15 मार्च 2026 रविवार को षडशीति संक्रान्ती है।*
🙏 *पुण्यकाल : सूर्योदय से दोपहर 12:36 तक… जप, तप, ध्यान और सेवा का पूण्य 86000 गुना है !!!*
🙏 *इस दिन करोड़ काम छोड़कर अधिक से अधिक समय जप – ध्यान, प्रार्थना में लगायें।*
🙏 *षडशीति संक्रांति में किये गए जप ध्यान का फल ८६००० गुना होता है – (पद्म पुराण )*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *पापमोचनी एकादशी* 🌷
➡️ *14 मार्च 2026 शनिवार को सुबह 08:10 से 15 मार्च, रविवार को सुबह 09:16 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष – 15 मार्च, रविवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
🙏🏻 *जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
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