
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
*卐 ~ वैदिक पंचांग ~卐*
*🌞दिनांक – 01 मार्च 2026*
*⛅दिन – रविवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वसंत*
*🌥️ अमांत – 17 गते फाल्गुन मास प्रविष्टि*
*🌥️ राष्ट्रीय तिथि – 9 फाल्गुन मास*
*⛅मास – फाल्गुन*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – त्रयोदशी शाम 07:09 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी*
*⛅नक्षत्र – पुष्य सुबह 08:34 तक तत्पश्चात् अश्लेशा*
*⛅योग – शोभन दोपहर 02:33 तक तत्पश्चात् अतिगण्ड*
*⛅राहुकाल – शाम 04:46 से शाम 06:12 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 06:45*
*⛅सूर्यास्त – 06:14 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:10 से प्रातः 05:59 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:16 से दोपहर 01:03 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त – मध्यरात्रि 12:14 से मध्यरात्रि 01:04 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, सर्वार्थसिद्धि योग, रविपुष्य योग ( सूर्योदय से सुबह 08:34 तक)*
*🌥️विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🔹देशी गोघृत सेवन के लाभ :🔹*
*🔸(१) हृदय स्वस्थ व बलवान होता है। रक्तदाब नियंत्रित रहता है । हृदय की रक्तवाहिनियों की धमनी प्रतिचय (atherosclerosis) से रक्षा करता है। अतः हृदयरोग से रक्षा हेतु तथा हृदय रोगियों के लिए यह घी अत्यंत लाभदायी है ।*
*🔸(२) इससे ओज की वृद्धि व दीर्घायुष्य की प्राप्ति होती है।*
*🔸(३) मस्तिष्क की कोशिकाएँ (neurons) पुष्ट हो जाती हैं, जिससे बुद्धि व इन्द्रियों की कार्यक्षमता विकसित होती है। बुद्धि, धारणाशक्ति एवं स्मृति की वृद्धि होती है।*
*🔸(४) मन का सत्व गुण विकसित होकर चिंता, तनाव, चिड़चिड़ापन, क्रोध आदि दूर होने में मदद मिलती है । मन की एकाग्रता बढ़ती है । साधना में उन्नति होती है ।*
*🔸(५) नेत्रज्योति बढ़ती है । चश्मा, मोतियाबिंद (cataract), काँचबिंदु (glaucoma) व आँखों की अन्य समस्याओं से रक्षा होती है ।*
*🔸(६) हड्डियाँ व स्नायु सशक्त होते हैं। संधिस्थान (joints) लचीले व मजबूत बनते हैं ।*
*🔸(७) कैंसर से लड़ने व उसकी रोकथाम की आश्चर्यजनक क्षमता प्राप्त होती है ।*
*🔸(८) रोगप्रतिरोधक शक्ति (immunity power) बढ़कर घातक विषाणुजन्य संक्रमणों (viral infections) से प्रतिकार करने की शक्ति मिलती है ।*
*🔸(९) जठराग्नि तीव्र व पाचन-संस्थान सशक्त होता है। मोटापा नहीं आता, वजन नियंत्रित रहता है । वीर्य पुष्ट होता है। यौवन दीर्घकाल तक बना रहता है ।*
*🔸(१०) चेहरे की सौम्यता, तेज एवं सुंदरता बढ़ती है। स्वर उत्तम होता है एवं रंग निखरता है। बाल घने, मुलायम व लम्बे होते हैं ।*
*🔸(११) गर्भवती माँ द्वारा सेवन करने पर गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है ।*
*इनके अतिरिक्त असंख्य लाभ प्राप्त होते हैं ।*
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