
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌤️ *दिनांक – 17 फरवरी 2026*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ऋतु*
🌥️ *राष्ट्रीय तिथि – 27 माघ मास*
🌤️ *मास – फाल्गुन ( गुजरात-महाराष्ट्र – माघ )*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – अमावस्या शाम 05:30 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – धनिष्ठा रात्रि 09:16 तक तत्पश्चात शतभिशा*
🌤️ *योग – परिघ रात्रि 12:29 तक तत्पश्चात शिव*
🌤️*राहुकाल – शाम 03:17 से शाम 04:40 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:56*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:06*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या, द्वापर युगादि तिथि, पंचक (आरंभ – सुबह 09:05 से), कंकणाकृति सूर्यग्रहण (भारत मे नही दिखेगा, नियम पालनीय नहीं है)*
💥 *विशेष – अमावस्या एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🚩*सनातन पंचांग*~🚩
🌷 *द्वापर युगादि तिथि* 🌷
➡ *17 फरवरी 2026 मंगलवार को द्वापर युगादि तिथि है ।*
🙏🏻 *जैसे कि हम जानते हैं कि चार युग होते है:-*
🙏🏻 *सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग, कलियुग ये सभी युग भिन्न भिन्न तिथियों को प्रारम्भ हुए थे l*
🙏🏻 *युग+आदि अर्थात युग के आरम्भ होने की तिथि, इसे ही युगादि तिथि कहते हैं अर्थात जिस तिथि को अतीत या भविष्य में एक नया युग आरम्भ हुआ या होगा, वही युगादि तिथि कहलाती है ।*
👉🏻 *युगादि तिथियाँ बहुत ही शुभ होती हैं, इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान, दान, यज्ञ, हवन आदि अक्षय (जिसका नाश/क्षय न हो) फल होता है l*
🙏🏻 *प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है ।*
🙏🏻 *नारद पुराण, हेमाद्रि, तिथितत्व, निर्णयसिन्धु, पुरुषचिन्तामणि, विष्णु पुराण और भुजबल निबन्ध में इसका उल्लेख प्राप्त है।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
➡ *17 फरवरी 2026 मंगलवार को दर्श-फाल्गुन अमावस्या है।*
🏡 *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
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