
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🌹 *वैदिक पंचांग ~* 🌹
🌤️ *दिनांक – 13 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*
🌥️ *अमांत – 29 गते पौष मास प्रविष्टि*
🌥️ *राष्ट्रीय तिथि – 23 पौष मास*
🌤️ *मास – माघ (गुजरात-महाराष्ट्र पौष)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – दशमी शाम 03:17 तक तत्पश्चात एकादशी*
🌤️ *नक्षत्र – विशाखा रात्रि 12:06 तक तत्पश्चात अनुराधा*
🌤️ *योग – शूल शाम 07:05 तक तत्पश्चात गण्ड*
🌤️ *राहुकाल – शाम 02:59 से शाम 04:16 तक से*
🌤️ *सूर्योदय – 07:35*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:15*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण-
💥 *विशेष –
🚩~*वैदिक पंचांग* ~🚩
🌷 *षट्तिला एकादशी* 🌷
➡️ *13 जनवरी 2026 मंगलवार को शाम 03:17 से 14 जनवरी, बुधवार को शाम 05:52 तक एकादशी है।*
💥 *विशेष – 14 जनवरी, बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।*
👉🏻 *षट्तिला एकादशी के दिन | स्नान, उबटन जिसमे जौ और तिल पड़ा हो | जौ डाला हुआ पानी पीना, तिल डाला हुआ पानी लेना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना ये पापनाशक प्रयोग है |
🚩 *~ वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌷 *षटतिला एकादशी* 🌷
➡ *इन 6 कामों में करें तिल का उपयोग*
🙏🏻 *षटतिला एकादशी व्रत में तिल का छ: रूपों में उपयोग करना उत्तम फलदाई माना जाता है। जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का उपयोग तथा दान करता है, उसे उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। षटतिला एकादशी पर 6 प्रकार से तिल के उपयोग तथा दान की बात कही है, वह इस प्रकार है-*
🌷 *तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।*
*तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।*
➡ *अर्थात- इस दिन तिलों के जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीने, तिल का भोजन तथा तिल का दान करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन हमें पद्मपुराण के ही एक अंश का श्रवण और ध्यान करना चाहिए। इस दिन काले तिल व काली गाय दान करने का विशेष महत्व है।*
🚩 *~ वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌷 *स्वास्थ्य सुरक्षा की सुव्यवस्था* 🌷
🙏🏻 *मकर संक्रान्ति के दिन तिल गुड़ के व्यंजन और चावल में मूंग की दाल मिलाकर बनाई गई खिचड़ी का सेवन ऋतु-परिवर्तनजन्य रोगों से रक्षा करता है । इनका दान करने का भी विधान है ।*
🙏🏻 *मकर संक्रान्ति पर्व पर तिल के उपयोग की महिमा पर शास्त्रीय दृष्टि से प्रकाश डालते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : ‘’जो मकर संक्रांति में इन छह प्रकारों से तिलों का उपयोग करता है वह इहलोक और परलोक में वांछित फल पाता है – तिल का उबटन, तिलमिश्रित जल से स्नान, तिल-जल से अर्घ, तिल का होम, तिल का दान और तिलयुक्त भोजन । किंतु ध्यान रखें – रात्रि को तिल व उसके तेल से बनी वस्तुएं खाना वर्जित है ।‘’*
🚩 *~ वैदिक पंचांग ~* 🚩
🌷 *उत्तरायण विशेष* 🌷
🙏🏻 *जिनके जीवन में अर्थ का अभाव… पैसों की तंगी बहुत देखनी पड़ती है जिनको कोई बहुत परेशान कर रहा है जिनके शरीर में रोग रहते हैं ..मिटते नहीं हैं उन सभी के लिए ये योग बहुत सुन्दर है क्या करें ?*
🙏🏻 *तपस्या कर सकें तो बहुत अच्छा है .. नमक -मिर्च नहीं खाना उस दिन आदित्यह्रदय स्त्रोत्र का पाठ भी जरुर करें ..जितना हो सके १/२/३ बार… जो आप चाहते हैं …सुबह स्नान आदि करके श्वास गहरा लेके रोकना …गायत्री मंत्र बोलना …संकल्प करना …”हम ये चाहते हैं प्रभु !…ऐसा हो ..” फिर श्वास छोड़ना … ऐसा ३ बार जरुर करें फिर अपना गुरु मंत्र का जप करें और सूर्य भगवन को अर्घ दें तो ये २१ मंत्र बोलें*
🌷 *ॐ सूर्याय नमः*
🌷 *ॐ रवये नमः*
🌷 *ॐ भानवे नमः*
🌷 *ॐ आदित्याय नमः*
🌷 *ॐ मार्तण्डाय नमः*
🌷 *ॐ भास्कराय नमः*
🌷 *ॐ दिनकराय नमः*
🌷 *ॐ दिवाकराय नमः*
🌷 *ॐ मरिचये नमः*
🌷 *ॐ हिरणगर्भाय नमः*
🌷 *ॐ गभस्तिभीः नमः*
🌷 *ॐ तेजस्विनाय नमः*
🌷 *ॐ सहस्त्रकिरणाय नमः*
🌷 *ॐ सहस्त्ररश्मिभिः नमः*
🌷 *ॐ मित्राय नमः*
🌷 *ॐ खगाय नमः*
🌷 *ॐ पूष्णे नमः*
🌷 *ॐ अर्काय नमः*
🌷 *ॐ प्रभाकराय नमः*
🌷 *ॐ कश्यपाय नमः*
🌷 *ॐ श्री सवितृ सूर्य नारायणाय नमः*
🙏🏻 *पौराणिक सूर्य भगवान की स्तुति का मंत्र अर्घ देने से पहले बोले :-*
🌷 *”जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।”*
🙏🏻 *गाय को कुछ घास आदि डाल दें ।*
🚩 *~ वैदिक पंचांग ~* 🚩
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