
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

*🌞~ वैदिक पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 12 जनवरी 2026*
*⛅दिन – सोमवार*¹
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – दक्षिणायण*
*⛅ऋतु – शिशिर*
*🌥️ अमांत – 28 गते पौष मास प्रविष्टि*
*🌥️ राष्ट्रीय तिथि – 22 पौष मास*
1*⛅मास – माघ*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – नवमी दोपहर 12:42 तक तत्पश्चात् दशमी*
*⛅नक्षत्र – स्वाती रात्रि 09:05 तक तत्पश्चात् विशाखा*
*⛅योग – धृति शाम 06:12 तक तत्पश्चात् शूल*
*⛅राहुकाल – सुबह 08:32 से सुबह 09:53 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 07:34*
*⛅सूर्यास्त – 05:15. (सूर्योदय एवं सूर्यास्त हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 05:25 से प्रातः 06:18 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:14 से दोपहर 12:57 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:09 जनवरी 13 से रात्रि 01:02 जनवरी 13 तक (हरिद्वार मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण – स्वामी विवेकानंद जयंती, राष्ट्रीय युवा दिवस*
*🌥️विशेष – नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है एवं दशमी को कलम्बी शाक त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🔹शिशिर ऋतु विशेष🔹*
*👉 1. इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए तेल की मालिश करनी चाहिए ।*
*👉 2. चने के आटे, आँवले के उबटन का प्रयोग लाभकारी है। कसरत करना अर्थात् दंड-बैठक लगाना, कुश्ती करना, दौड़ना, तैरना आदि एवं प्राणायाम और योगासनों का अभ्यास करना चाहिए ।*
*👉 3. सूर्य नमस्कार, सूर्यस्नान एवं धूप का सेवन इस ऋतु में लाभदायक है ।*
*👉 4. सामान्य गर्म पानी से स्नान करें किन्तु सिर पर गर्म पानी न डालें ।*
*👉 5. कितनी भी ठंडी क्यों न हो सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए । रात्रि में सोने से हमारे शरीर में जो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है वह स्नान करने से बाहर निकल जाती है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है ।*
*👉 6. सुबह देर तक सोने से यही हानि होती है कि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय, शुक्राशय आदि अंगों पर अपना खराब असर करती है जिससे अलग-अलग प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं । इस प्रकार सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से इन अवयवों को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखा जा सकता है ।*
*👉 7. गर्म-ऊनी वस्त्र पर्याप्त मात्रा में पहनना,अत्यधिक ठंड से बचने हेतु रात्रि को गर्म कंबल ओढ़ना, रजाई आदि का उपयोग करना, गर्म कमरे में सोना लाभदायक है ।*
*🔷 अपथ्य : इस ऋतु में अत्यधिक ठंड सहना, ठंडा पानी, ठंडी हवा, भूख सहना, उपवास करना, रूक्ष, कड़वे, कसैले, ठंडे एवं बासी पदार्थों का सेवन, दिवस की निद्रा, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है ।*
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