
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल
*🌞~ वैदिक पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक – 25 मार्च 2025*
*⛅ दिन – मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2081*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – बसन्त*
*🌥️अमांत – 12 गते चैत्र मास प्रविष्टि*
*🌥️राष्ट्रीय तिथि – 4 चैत्र मास*
*⛅मास – चैत्र*
*⛅पक्ष – कृष्ण*
*⛅तिथि – एकादशी प्रातः 03:45 मार्च 26 तक तत्पश्चात् द्वादशी*
*⛅नक्षत्र – श्रवण प्रातः 03:49 मार्च 26 तक तत्पश्चात् घनिष्ठा*
*⛅योग – शिव दोपहर 02:53 तक तत्पश्चात् सिद्ध*
*⛅ राहुकाल- दोपहर 03:25 से शाम 04:56 तक*
*⛅सूर्योदय – 06:17*
*⛅सूर्यास्त – 06:31*
*⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से प्रातः 05:52 तक*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:21 से दोपहर 01:10 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 मार्च 26 से रात्रि 01:09 मार्च 26 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण – पापमोचनी एकादशी*
*25 मार्च को चावल न खायें एवं व्रत उपवास 26 मार्च ।*
*⛅ विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹गृह के समीपस्थ वृक्ष 🔹*
*🔸 ईशान में आँवला शुभदायक है ।*
*🔸 ईशान – पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं ।*
*🔸 (३) घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें ।*
*🔸 काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये-*
*आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय ।*
*फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥*
*(बृहत्संहिता ५३। ८६)*
*(४) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका।*
*प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥*
*🔸 (समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) ‘बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । ‘*
*🔸 अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥*
*🔸 (बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) ‘पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।’*
*🔸 (५) घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।*
*(ब्रह्मवैवर्तपुराण, कृष्ण० १०३ । ६२-६३ )*
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