2 thoughts on “पुस्तक समीक्षा: नरेंद्र गीतिका : दीनदयाल सुंदरियाल की अनुपम कृति।

  1. समूचा पहाड़ थैं ये अनुपम उपहार देणा वास्ता आदरणीय नेगी जी कु सादर आभार अर प्रणाम निसंदेह समस्त उत्तराखण्ड का जनमानस तलक पोंछलि ।। आप अर आपक गीत अमर छन , अमूल्य धरोहर हमरि संस्कृति व गीत संगीत म उत्तराखण्ड बसदु ।। धन्यबाद ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *