
पहाड़ का सच/एजेंसी।
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एकता, AI से लेकर फ्रांस प्रोटेस्ट तक, सभी मुद्दों पर बात की। उन्होंने नशे की समस्या, सही-गलत के बीच अंतर समझने और नई पीढ़ी को संस्कार सिखाने पर भी जोर दिया।
RSS प्रमुख मोहन भागवतबने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बंगाल के राज नायारण बसु का जिक्र किया। उनके जन्म को 200 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा, समाज में स्वदेशी मेलों के जरिए लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करने के लिए राज नायारण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से भारत को उसकी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत बनाने का काम कर रहा है। भागवत ने स्वदेशी अपनाने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष में जिन पांच प्रमुख बदलावों पर जोर दिया जा रहा है, उनमें अपनी पहचान का बोध और स्वदेशी चीजों को अपनाना शामिल है।
मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है। देखिए फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है, नेपाल, बांग्लादेश में क्या हुआ। वे कहते हैं रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी, ? लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं है। पहले नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की विविधता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत माता का सर्वोच्च स्थान है। देश में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं। लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है। भागवत ने कहा कि देश पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी इसी एकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा।
मोहन भागवत ने ड्रग्स की समस्या पर भी बात की।बउन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी नशीली दवाओं की आदी होती जा रही है। उन्होंने नशे को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि अभिभावकों को आने वाली पीढ़ी को इसे लेकर सीख देने की बात की है।
उन्होंने कहा कि समाज, देश को चलाना सभी की जिम्मेदारी है।और अगर आंदोलन के पीछे अपनेपन की प्रेरणा है तो ठीक है लेकिन अगर अगर आंदोलन दूसरे लक्ष्य से चले तो वह राजनीति का साधन बन जाता है , और’अगर यह किसी व्यक्ति, समूह, विचार के प्रति विरोध बढ़ाने का काम करता है तो इसका फायदा भारत को दबाने वाली शक्तियां उठाएंगी।
मोहन भागवत ने नई पीढ़ी में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सीखने के लिए उत्सुक रहती है और नई चीज़ें उसे आकर्षित करती हैं। लेकिन उसे सही गलत का अंतर समझना चाहिए।
भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म और दूसरे माध्यमों पर नियम, अनुशासन पर शासन से बात करने का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि समझ की कमी के कारण व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में कई तरह के दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं।
दशहरे के अवसर पर RSS देशभर में पथ संचलन के कार्यक्रम भी आयोजित करता है। यह परंपरा संघ की मजबूती और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। यह परंपरा संघ की स्थापना के दिन से चली आ रही है।
बताते चलें कि साल 1925 में दशहरे के ही दिन नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। दशहरे के मौके पर RSS देशभर में पथ संचलन के कार्यक्रम भी आयोजित करता है।


