-पिछले कई दिनों से स्वास्थ्य लाभ ले रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तराखंड लौटे
– राजनीतिक नहीं ,धार्मिक यात्रा के जरिए सत्ता प्रतिष्ठान व विरोधियों को दिया संदेश
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून।
पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत शहीदों को नमन और जनसंपर्क के साथ हुई।
उनकी इस यात्रा को भले ही राजनीतिक यात्रा के रूप में न दर्शाया गया हो लेकिन इसके राजनीतिक निहतार्थ निकाले जाने लगे हैं. रविवार को हरीश रावत की यात्रा की शुरुआत मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई.यात्रा का समापन भी देहरादून में कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर नमन के साथ हुआ।

जो दिखाता है कि एक वरिष्ठ राजनेता अपने राज्य की नींव रखने वाले आंदोलनकारियों के प्रति कितनी गहरी संवेदनशीलता रखता है। नारसन से रुड़की, हरिद्वार और देहरादून तक जगह-जगह उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और फूलों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने भावुक होकर नारा दिया कि “शेर एक बार फिर वापस आ चुका है”।
हरीश रावत ने खुद सोशल मीडिया पर लिखा कि “अपने लोगों का यही प्यार और स्नेह मेरी सबसे बड़ी ताकत है।” आमतौर पर राजनीतिक दौरों में तीखे बयानों की भरमार होती है, लेकिन इस यात्रा के दौरान हरीश रावत का रवैया बेहद सौम्य रहा। उन्होंने कहा कि वह किसी शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि केवल जनता का धन्यवाद करने और उनका आशीर्वाद लेने निकले हैं।
राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देख रहे हैं। हाल ही में संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश के बाद, इस यात्रा के जरिए हरीश रावत ने यह संदेश भी दिया है कि वे अभी भी उत्तराखंड की राजनीति के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली चेहरों में से एक है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रामपुर तिराहे से देहरादून के शहीद स्मारक स्थल तक रावत का जिस गर्मजोशी के साथ स्वागत किया उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री का राजनीतिम नेटवर्क आज भी मजबूत है। ऐसी स्थिति में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

