– आधे हिस्से पर होगा हिमाचल का अधिकार , अन्य सहयोगी चार राज्यों को पानी व सिंचाई की सुविधा
– परियोजना से 422 से 660 मेगावाट बिजली उत्पादन का अनुमान
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर बनने वाली किशाऊ बांध परियोजना से उत्तराखंड को बिजली उत्पादन का आधा हिस्सा मिलेगा जबकि आधे हिस्से पर हिमाचल का अधिकार होगा। एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य को करीब 211 मेगावाट बिजली मिलेगी।

मंगलवार को हुए समझौते के अनुसार उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जल घटक की लागत वहन नहीं करनी होगी, जिसके बदले में दोनों राज्यों को परियोजना से उत्पादित होने वाली बिजली में एक महत्वपूर्ण हिस्सा मिलेगा। परियोजना से कुल लगभग 422 मेगावाट से 660 मेगावाट तक हरित ऊर्जा (पनबिजली) का उत्पादन होगा, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रीय महत्व की इस बहुउद्देशीय परियोजना से क्षेत्रीय विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मंगलवार को हुए ऐतिहासिक समझौते (MoU) के अनुसार, इस परियोजना की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट तय की गई है। उत्पादन को दोनों भागीदार पर्वतीय राज्यों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच 50-50% के समान अनुपात में बांटा जाएगा। इस तरह दोनों राज्यों को 211-211 मेगावाट बिजली का सीधा लाभ मिलेगा।
पूर्व के कुछ प्रस्तावों में इसकी कुल क्षमता 660 मेगावाट आंकी गई थी, जिसके आधार पर हिस्सेदारी 330 मेगावाट बनती, लेकिन हालिया अंतिम समझौते में इसे आधिकारिक तौर पर 422 मेगावाट क्षमता के साथ ही मंजूरी दी गई है। उत्तराखंड के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि उसे बांध के पानी (जल घटक) से जुड़े खर्चों का वहन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि यह खर्च पानी का उपयोग करने वाले अन्य राज्य उठाएंगे। उत्तराखंड को सिर्फ अपने हिस्से की बिजली उत्पादन की लागत देनी होगी जो अनुमानित 1500 करोड़ हो सकती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “पहाड़ का सच” से कहा कि आज का दिन केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर करने का अवसर नहीं है, बल्कि लगभग आठ दशकों (85 वर्ष) से प्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किशाऊ कोई सामान्य बांध परियोजना नहीं है। यह जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की महा-परियोजना है।
सीएम धामी ने कहा कि यह परियोजना केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र की नहीं है, बल्कि यह राज्यों के आपसी तालमेल और सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने रेखांकित किया कि टोंस नदी पर बनने वाले 232.6 मीटर ऊंचे इस बांध से 1562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा और 422 मेगावाट (या कुल 660 मेगावाट की क्षमता) विद्युत उत्पादन होगा। इसका सीधा लाभ उत्तराखंड और हिमाचल के साथ-साथ पूरे ऊपरी यमुना बेसिन (यूपी, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान) को मिलेगा।

