चमोली। आज भी उत्तराखण्ड के पहाड़ों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि पहाड़ के गांवों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेहतर जीवन की बुनियादी जरूरत है।
पहाड़ी गांवों में सड़क की जरूरत आज भी कई लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र के सकंड गांव से सामने आए एक वीडियो में ग्रामीण खुद गैती और फावड़ा लेकर सड़क निर्माण में जुटे नजर आ रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि, लंबे समय से सड़क की मांग को लेकर प्रयास और इंतजार किया जा रहा था। लेकिन जब सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए खुद रास्ता तैयार करने का फैसला किया। सरकारी स्तर पर विकास योजनाएं और आश्वासन अपनी जगह हैं, लेकिन जब ग्रामीणों को अपनी मूलभूत जरूरत के लिए खुद फावड़ा और गैती उठानी पड़े, तो यह व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।
यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पहाड़ के कई दूरस्थ गांवों की उस हकीकत को सामने लाती है, जहां सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

