
सुनियोजित षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं होगा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जांच की मांग : नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य
फर्जी वोटरों, घुसपैठियों के नाम कटने का दर्द कांग्रेस को ही क्यों? : महेंद्र भट्ट भाजपा अध्यक्ष
पहाड़ का सच देहरादून। मतदाता सूचियों में पुनरीक्षण व नोटिस की प्रक्रिया के बाद एक बार फिर कांग्रेस ,भाजपा में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि साजिशन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। बदले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस को फर्जी वोटरों व घुसपैठियों का नाम कटने का दर्द हो रहा है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बाजपुर विधानसभा सहित प्रदेश की विभिन्न विधानसभाओं में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दायर की गई संदिग्ध आपत्तियों को लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2026 के फॉर्म-10 के ऑनलाइन अवलोकन में केवल बाजपुर विधानसभा के भाग संख्या 27, 142 एवं 149 में ही 93 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 प्रस्तुत किए गए हैं।

आर्य ने कहा इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि इसी प्रकार की शिकायतें प्रदेश की अन्य विधानसभाओं से भी सामने आ रही हैं। प्रथम दृष्टया यह किसी संगठित गिरोह अथवा सुनियोजित नेटवर्क की साजिश प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को उनके संवैधानिक मताधिकार से वंचित करना और निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित करना है।
यशपाल आर्य ने कहा कि यदि हजारों मतदाताओं के नाम इस प्रकार फर्जी आपत्तियों के आधार पर हटाने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर प्रदेश में यह संगठित खेल किसके संरक्षण में चल रहा है। लोकतंत्र में मतदाता सर्वोपरि होता है और उसके अधिकारों पर किसी भी प्रकार का प्रहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आर्य ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर मांग की है कि प्रदेश के सभी मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (म्त्व्) को तत्काल निर्देश जारी किए जाएं कि फर्जी एवं दुर्भावनापूर्ण तरीके से फॉर्म-7 दाखिल करने वाले व्यक्तियों, गिरोहों अथवा उनके पीछे सक्रिय तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध निर्वाचन कानूनों एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि 3 अगस्त 2026 के फॉर्म-10 में दर्ज सभी आपत्तिकर्ताओं को नियमानुसार फॉर्म-13 तथा जिन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं, उन सभी को फॉर्म-14 के तहत अनिवार्य नोटिस जारी कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से न हटाया जा सके।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि किसी संगठित गिरोह द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से फर्जी आपत्तियां दायर की गई हैं, तो ऐसे लोगों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। आर्य ने चेतावनी दी है कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश के एक-एक मतदाता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इस गंभीर प्रकरण में तत्काल निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में लोकतंत्र बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन छेड़ने को बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार और निर्वाचन तंत्र पर होगी।

फर्जी वोटरों, घुसपैठियों के नाम कटने का दर्द कांग्रेस को ही क्यों? महेंद्र भट्ट भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
कांग्रेस बताए, अपात्र, फर्जी और दोहरे वोटर ,उसके ही समर्थक कैसे? :
उत्तराखंड का फैसला राज्य की देवतुल्य जनता करेगी, फर्जी और घुसपैठिए वोटर नहीं
सबूत पेश करे अन्यथा संवैधानिक प्रक्रिया को बदनाम करना बंद करे कांग्रेस
भाजपा ने कांग्रेस द्वारा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि अपात्रों एवं घुसपैठियों के नाम हटाये जा रहे हैं, यदि उनमें अधिकांश कांग्रेस समर्थक हैं तो उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए कि ऐसा क्यों है? बावजूद इसके संवैधानिक प्रक्रिया पर अनर्गल सवाल उठाकर, कांग्रेस ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिश कर रही है।
मीडिया को दी प्रतिक्रिया में उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं अन्य नेताओं पर एसआईआर के तहत फार्म 7 और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर झूठ एवं भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर का सीधा और स्पष्ट उद्देश्य ही मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाना है जो लोग अपात्र हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो अन्यत्र शिफ्ट हो गए हैं, नियमानुसार उनके नाम सूची से हटाए जाना एक तय कानूनी प्रक्रिया है। इसी क्रम में फार्म 7 भी एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मतदाता को प्रदत्त कानूनी अधिकार है, जिसमें मृत्यु, शिफ्ट होने या गलत जानकारी देकर जुड़े नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है।
ऐसे में यदि कुछ गलत नहीं है तो किसी भी वैध वोटर का नाम कट ही नहीं सकता, लिहाजा किसी को डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन कांग्रेस इस सरल प्रक्रिया को लेकर झूठ एवं भ्रम फैला रही है। वहीं कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए सवाल उठाया, “यदि एक पल के लिए कांग्रेस के आरोपों को मान भी लिया जाए, तो कांग्रेस अध्यक्ष को प्रदेश की जनता को जवाब देना और भी अधिक जरूरी हो जाता है। कि जांच में जो भी फर्जी, अयोग्य और अपात्र पाए जा रहे या पाये जायेंगे, वे सब कांग्रेस के ही समर्थक क्यों निकल रहे हैं या निकलेंगे।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को भी आत्मचिंतन करना होगा कि ऐसा क्यों होता है, हर बार धांधली और गड़बड़ी करने वालों में ही कांग्रेस को अपने समर्थक नजर आते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि दरअसल कांग्रेस का यह दर्द लोकतंत्र के प्रति नहीं, बल्कि अपने खास वोट बैंक के खिसकने का है। हकीकत यह है कि कांग्रेस एक खास वर्ग के घुसपैठियों को राजनैतिक संरक्षण देना चाहती है। आज जब वर्ग-विशेष के दोहरे और अवैध वोटरों के नाम कट या उनपर जागरूक मतदाता आपत्ति कर रहे हैं, तो कांग्रेस को सबसे ज्यादा पीड़ा हो रही है। इससे तो यही साबित होता है कि कांग्रेस को प्रदेश के वैध मतदाताओं की चिंता नहीं बल्कि अपने असल वोट बैंक, अवैध एवं घुसपैठियों की चिंता है
वहीं पार्टी का स्टैंड दोहराते हुए कहा कि भाजपा और सरकार का रुख बिल्कुल साफ और स्पष्ट है, उत्तराखंड के भविष्य और यहां की सरकार का निर्णय देवभूमि की सम्मानित जनता करेगी, कोई फर्जी वोटर या अवैध घुसपैठिया नहीं। कानून के दायरे में रहकर मतदाता सूची के शुद्धिकरण का यह काम मजबूती से जारी रहेगा।

