
नवाचार मंत्र की हकीकत जानने को सीएम धामी को करना पड़ा हस्तक्षेप
उत्तराखंड में ऑल इंडिया सर्विस व सीनियर पीसीएस अफसरों द्वारा गोद लिए गावों की तस्वीर आएगी सामने
इनमें दोनों मंडलों के आयुक्त भी शामिल हैं,जो जिला प्रशासन व राज्य सरकार के बीच की अहम कड़ी है
हरीश जोशी/पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड में काम कर रहे आईएएस, आईपीएस,आईएफएस और पीसीएस अधिकारियों को अपनी पहली पोस्टिंग वाले क्षेत्र/गांव को गोद लेने और वहां रात्रि प्रवास करने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कितना अमल हुआ,इसकी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। डेढ़ साल पहले दिए गए मिशन को कामयाब बनाने में अफसरों ने कितनी रुचि दिखाई,सच्चाई जानने के लिए सीएम ने 50 दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मार्च 2025 में अखिल भारतीय सेवा व सीनियर pcs (IAS/IPS/ifs व pcs) अधिकारियों को अपनी पहली नियुक्ति वाले क्षेत्र/गांव को गोद लेने के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देश के बाद मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा 20 मई 2025 को औपचारिक आदेश जारी किया गया था।
पहली पोस्टिंग के समय अधिकारियों को उस तहसील, ब्लॉक या क्षेत्र को गोद लेना था जहां उन्होंने अपनी सेवा की शुरुआत की थी। अधिकारियों को गोद लिए गए गांव में रात गुजारकर जमीनी समस्याओं को समझना था। सीएसआर (CSR) और सरकारी धन का उपयोग कर गांव के विकास का एक्शन प्लान तैयार करना था। सीएम की इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों के लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ राज्य के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों को मिल सके।

इस योजना के तहत राज्य के 40 से अधिक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी पहली पोस्टिंग वाले क्षेत्रों और गांवों को गोद लिया है। अधिकारियों को केवल कागजी कार्रवाई करने के बजाय उन क्षेत्रों में जाकर रात बिताने के निर्देश दिए गए थे। इसका मकसद ग्रामीणों की समस्याओं और जमीनी हकीकतों को बेहद करीब से समझना है।
अधिकारियों को अपने गोद लिए क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, अस्पतालों, राशन की दुकानों और अन्य संस्थानों का भौतिक निरीक्षण करने को कहा गया ताकि व्यवस्थाओं में सुधार लाया जा सके। .इन क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अधिकारियों को एक्शन प्लान (कार्य योजना) तैयार करने और विकास कार्यों के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड व जिला योजनाओं के बजट का सही इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
50 दिनों में मांगी रिपोर्ट: मुख्यमंत्री ने हाल ही में सचिवालय की बैठक में अधिकारियों द्वारा किए गए इन सभी नवाचारों की विस्तृत सूची 50 दिनों के भीतर शासन को उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
इस योजना में 8700 या उससे अधिक ग्रेड-पे वाले सभी प्रमुख सचिव, सचिव, और अपर सचिव स्तर के 40 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। इन सभी अधिकारियों ने उत्तराखंड गठन के समय या उससे पहले (उत्तर प्रदेश के समय) अपनी पहली पोस्टिंग वाले विकासखंड, तहसील या जिला मुख्यालय को गोद लिया है।सीएम ने इस योजना से जुड़े सामाजिक-आर्थिक बदलावों और नवाचारों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है

