
पहाड़ का सच/एजेंसी। ओडिशा के केओंझार जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी बहन के कंकाल को बैंक ले जाने की घटना के बाद विवाद बढ़ गया। सिस्टम की सख्ती और कागजी नियमों के आगे एक गरीब आदिवासी की बेबसी इस कदर उजागर हुई कि उसे अपनी मृत बहन का कंकाल ही “सबूत” बनाकर बैंक तक लाना पड़ा। सिर्फ ₹19,300 के लिए भाई ने वो कदम उठाया, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल गया।

इस मामले में अब बैंक ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने कभी भी मृत खाताधारक को फिजकली लाने की मांग नहीं की थी। बैंक के अनुसार, जीतू मुंडा नाम का शख्स अपनी बहन कलारा मुंडा के खाते से पैसे निकालने के लिए पहली बार ब्रान्च में पहुंचा था। बैंक अधिकारियों ने उसे बताया कि बिना उचित अनुमति के किसी तीसरे व्यक्ति को खाते से पैसे निकालने की अनुमति नहीं होती।
जब उसने बताया कि खाताधारक की मृत्यु हो चुकी है, तो शाखा प्रबंधक ने समझाया कि ऐसे मामलों में पैसे निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता है।बबैंक के मुताबिक, बाद में वह व्यक्ति कथित रूप से नशे की हालत में वापस आया और शाखा में हंगामा करने लगा। इसके बाद वह अपनी बहन के कथित कंकाल अवशेष लेकर आया और उसे बैंक के बाहर रखकर पैसे निकालने की मांग करने लगा।
इस घटना से बैंक परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की मौजूदगी में पूरे मामले को संभाला गया. बैंक का कहना है कि यह घटना दावों के निपटान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी की कमी और नियमों को न मानने की वजह से हुई। बैंक ने किसी भी तरह की बदसलूकी या उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
बैंक ने कहा कि खाताधारक के पैसे सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ही नियमों का पालन किया गया, साथ ही, स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद दावे का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

