
80+ विश्वविद्यालयों के 450+ प्रतिभागियों के साथ देश का सबसे बड़ा अकादमिक लॉ फेस्ट

देहरादून। यू.पी.ई.एस. स्कूल ऑफ लॉ ने विधिउत्सव 2026 के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया, जिसे व्यापक रूप से भारत का सबसे बड़ा अकादमिक लॉ फेस्ट माना जाता है। इस आयोजन में भारत और विदेशों के 80 से अधिक विश्वविद्यालयों से आए 450 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में छात्रों, विधि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों ने समकालीन कानूनी मुद्दों, प्रतिस्पर्धात्मक मंचों और अनुभवात्मक शिक्षण पर गहन चर्चा और सहभागिता की।
इस फेस्ट का शुभारंभ एक भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हुआ, जिसमें भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और उत्तराखंड राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति राजेश टंडन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने मुख्य संबोधन में न्यायमूर्ति धूलिया ने कानून के आधार के रूप में करुणा के महत्व पर प्रकाश डाला और संवैधानिक नैतिकता, न्यायिक ईमानदारी तथा भारत की विधिक संरचना को आकार देने में समावेशन की भूमिका पर जोर दिया।
विधिउत्सव 2026 में 13 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें मूट कोर्ट, मध्यस्थता, वार्ता, क्लाइंट काउंसलिंग, यूथ पार्लियामेंट, पॉलिसी ड्राफ्टिंग, स्पोर्ट्स लॉ, एनिमल लॉ और प्रो बोनो सेवाएं शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं को वास्तविक जीवन की कानूनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था, जिससे प्रतिभागियों को वकालत, विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित करने का अवसर मिला।
फेस्ट का बौद्धिक केंद्र ‘विधि संगोष्ठी’ रहा, जिसमें कानून और शासन से जुड़े समकालीन मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। संगोष्ठी का एक प्रमुख आकर्षण “आज की रानी: ब्रेकिंग द ग्लास सीलिंग इन लॉ, पॉलिसी एंड नेशनल सर्विस” सत्र रहा, जिसमें रक्षा कर्मियों, नीति सलाहकारों और शासन विशेषज्ञों ने महिलाओं के नेतृत्व और प्रतिनिधित्व पर सार्थक संवाद किया। संगोष्ठी में लैंगिक असमानता, न्याय तक पहुंच और बदलते शासन ढांचे जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
यह आयोजन छात्रों और विधि क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों—जजों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, कॉर्पोरेट काउंसल्स और लॉ फर्म पार्टनर्स—के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना। उद्योग विशेषज्ञों जैसे सुश्री अमी राणा (पार्टनर, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी), सुश्री मोलश्री भटनागर (पार्टनर, एचएसए एडवोकेट्स), सुश्री स्वाति अग्रवाल (पार्टनर, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी), श्री गौहर मिर्जा (पार्टनर, सराफ एंड पार्टनर्स), श्री काशिश बंसल (सीनियर एसोसिएट, सिंघानिया एंड पार्टनर्स एलएलपी), श्री माधवम शर्मा (प्रिंसिपल एसोसिएट, खैतान एंड कंपनी), श्री मयंक ग्रोवर (पार्टनर, सिंघानिया एंड पार्टनर्स), और श्री विनय कुमार संडूजा (रजिस्ट्रार, इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर) ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया और उद्योग-अकादमिक संबंधों को मजबूत किया।
इस अवसर पर यू.पी.ई.एस. के वाइस चांसलर, डॉ. सुनील राय ने कहा, “यू.पी.ई.एस. में हम मानते हैं कि विधि शिक्षा का भविष्य अनुभवात्मक, गहन और बहु-विषयक शिक्षण में निहित है। विधिउत्सव इसी सोच का प्रतिबिंब है, जो अकादमिक जगत, उद्योग और न्यायपालिका को एक मंच पर लाकर छात्रों को संवाद, प्रश्न और जिम्मेदार विधि पेशेवर के रूप में विकसित होने का अवसर प्रदान करता है।”
फेस्ट का समापन एक भव्य समापन समारोह के साथ हुआ, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. नवीन कुमार सिंह (सीईओ, इंडिया इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर), डॉ. विनय नारायण परांजपे (प्रेसिडेंट – लीगल, पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड), डॉ. ए. वेंकटेशन (जनरल मैनेजर – लॉ, गेल इंडिया लिमिटेड), श्री अखिलेश रावत (उप महाधिवक्ता, उत्तराखंड, सुप्रीम कोर्ट), और श्री कुमार सल्वा रघुवंशी (चीफ मैनेजर, ऑयल इंडिया लिमिटेड) उपस्थित रहे।
बढ़ते पैमाने, व्यापक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के साथ, विधिउत्सव एक ऐसे समग्र अकादमिक मंच के रूप में विकसित हो रहा है, जो प्रतियोगिता, सहयोग और सार्थक संवाद को एक साथ लाता है। यह नवीनतम संस्करण यू.पी.ई.एस. स्कूल ऑफ लॉ की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह अनुभवात्मक शिक्षण और विधिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ मजबूत जुड़ाव के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार विधि पेशेवरों का निर्माण कर रहा है।
