
जयंती पर विशेष/पहाड़ का सच

देहरादून। डा.भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार, समाज सुधारक थे। महार जाति में जन्मे आंबेडकर ने भारी सामाजिक भेदभाव के बावजूद शिक्षा प्राप्त की और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने भारतीय संविधान की रचना की और 1956 में बौद्ध धर्म अपनाया।
पहाड़ का सच साप्ताहिक अखबार, मासिक पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल की तरफ से डॉ.भीमराव आंबेडकर की जयंती पर विन्रम श्रद्धांजलि
डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रमुख जीवनी विवरण:जन्म 14 अप्रैल 1891, महू (मध्य प्रदेश) माता-पिता: भीमाबाई (माता) और रामजी मालोजी सकपाल (पिता ब्रिटिश सेना में सूबेदार). शिक्षा: कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट. सामाजिक संघर्ष: छुआछूत के खिलाफ, मूकनायक (1920) और बहिष्कृत भारत (1927) जैसी पत्रिकाएं शुरू कीं. मुख्य भूमिका: स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष।
धर्म परिवर्तन: 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया।महापरिनिर्वाण (मृत्यु): 6 दिसंबर 1956, नई दिल्ली।मुख्य कार्य और विरासत:संविधान निर्माता: भारत के संविधान के जनक के रूप में, उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों को स्थापित किया।सामाजिक न्याय: ‘मूकनायक’, ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ के माध्यम से दलितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो: यह उनका प्रसिद्ध नारा था, जो दलितों को सशक्त बनाने का आधार बना।
महिला अधिकार: हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और तलाक के समान अधिकार देने की वकालत की। .डॉ. आंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
