
24 अप्रैल से नई टिहरी से शुरुआत, मई में नैनीताल,सरकारी विभाग भी देंगे सहयोग

जो अपने गांव में आर्थिक गतिविधि के इच्छुक हों ऐसे प्रवासियों को किया जाएगा मोटिवेट
पहाड़ का सच देहरादून। उत्तराखंड के प्रवासियों को अपने गांव में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने के उद्देश्य, पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए पलायन एवं ग्राम विकास आयोग राज्य के हर जिले में ‘प्रवासी पंचायत’ आयोजित कर रहा है. 24 अप्रैल 2026 से नई टिहरी इसकी शुरूआत होगी।

आयोग के उपाध्यक्ष एस एस नेगी ने “पहाड़ का सच” से मुलाकात में कहा कि प्रवासी पंचायतों का उद्देश्य प्रवासियों को विकास योजनाओं से जोड़ना और उन्हें घर वापसी के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि प्रवासी पंचायतों में विभागीय अधिकारियों को भी शामिल किया जा रहा है जो योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। साल 2026 -27 के लिए यह कार्यक्रम निरंतर चकता रहेगा. राज्य पर्वतीय क्षेत्रों पर फोकस किया गया है
प्रवासी पंचायत/सम्मेलन के मुख्य बिंदु: उद्देश्य: रिवर्स पलायन (Reverse Migration) को बढ़ावा देना, प्रवासियों को स्थानीय उद्यमिता से जोड़ना और राज्य के विकास में उनका अनुभव साझा करना।

शुरुआत: 24 अप्रैल 2026 को नई टिहरी से: पहचान: उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की देखरेख में आयोजित .क्रियान्वयन: प्रवासी अपनी पसंद के जिले के अधिकारियों के साथ सीधे संवाद कर उद्यमिता या अन्य योजनाएं शुरू कर सकते हैं. सम्मेलन 2025: इससे पहले 5 नवंबर 2025 को देहरादून में प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें देश भर से प्रवासी शामिल हुए। इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य राज्य के पहाड़ी गांवों की ओर प्रवासियों को वापस लाना है।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग (पूर्व में पलायन आयोग) का गठन 2017 में राज्य से हो रहे पलायन को रोकने, कारणों का विश्लेषण करने और ग्रामीण विकास के सुझाव देने के लिए किया गया था. यह आयोग पलायन प्रभावित 474 गांवों में रोजगार, कृषि और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से “रिवर्स माइग्रेशन” (घर वापसी) को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है।
प्रमुख विवरण और कार्य:स्थापना: अगस्त 2017 में, मुख्यालय पौड़ी गढ़वाल उपाध्यक्ष: डॉ. शरद सिंह नेगी नाम परिवर्तन: 2022 में “उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग” को सुदृढ़ कर “पलायन निवारण आयोग” के रूप में पुनर्गठित किया गया. मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, और कृषि/पशुपालन के माध्यम से आजीविका बढ़ाना।
प्रवासी पंचायत: पलायन आयोग अब प्रवासी उत्तराखंडियों को वापस गांव लौटने के लिए प्रेरित करने के लिए पूरे राज्य में ‘प्रवासी पंचायतों’ का आयोजन कर रहा है। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY): इस आयोग की सिफारिशों पर 474 पलायन प्रभावित गांवों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह योजना लागू की गई है। आयोग समय-समय पर रिपोर्ट के माध्यम से सरकार को पलायन की स्थिति से अवगत कराता है और नीतिगत बदलावों का सुझाव देता है.
