
पूर्व शिक्षा मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया,आंदोलन की चेतावनी

स्कूलों के खुलने के समय पर भी सवाल उठाए, कहा जंगली जानवर का खतरा रहता है
पहाड़ का सच देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व शिक्षा मंत्री,मंत्री प्रसाद नैथानी के कहा कि प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को बंद करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक निर्णय है। जब सरकार को इसे बंद ही करना था, तो आखिर इसे शुरू क्यों किया गया? लगभग 200 विद्यालयों में चल रही यह शिक्षा बच्चों को स्वरोज़गार और तकनीकी कौशल से जोड़ रही थी, लेकिन आज अचानक इसे समाप्त कर दिया गया।
अपने एक वीडियो में राज्य के सभी लोगों तक अपनी बात पहुंचाते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बच्चों ने इन विषयों को चुना, उनका भविष्य क्या होगा? वे अब कहाँ जाएंगे? और वे युवा, जिन्हें स्थानीय स्तर पर शिक्षण का अवसर मिला था, आज बेरोज़गार कर दिए गए,इसका जिम्मेदार कौन है?
उन्होंने कहा कि सरकार की स्थिति यह है कि नए विद्यालय तो खोले नहीं जा रहे, और जो पहले से हैं, उनमें भी प्रधानाचार्य तक नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर, स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी के नाम पर स्थापित राजकीय इंटर कॉलेज अखोड़ी में पहले ही दिन ताला लगा मिला,यह अत्यंत शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों के समय में परिवर्तन भी एक अव्यवहारिक निर्णय है। पहले स्कूल सुबह 7:45 पर खुलते थे, अब 7:10 कर दिए गए हैं। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जंगलों में बढ़ते बाघ-भालू के आतंक को नजरअंदाज करना बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
सरकार को यह समझना होगा कि शिक्षा विभाग कोई प्रयोगशाला नहीं है, जिसे मनमाने तरीके से चलाया जाए। यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है। मैं शिक्षक संगठनों से भी आग्रह करता हूँ कि वे इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं। “संगे शक्ति कलियुगे”—एकता में ही शक्ति है।
अंत में, सरकार से मांग है कि व्यावसायिक शिक्षा को तुरंत पुनः शुरू किया जाए, बेरोजगार हुए शिक्षकों को पुनः नियुक्त किया जाए,विद्यालय खुलने के समय के अव्यवहारिक निर्णयों को वापस लिया जाए अन्यथा, इसके परिणाम भुगतने के लिए सरकार तैयार रहे।
