
कांग्रेस ने मुद्दों पर सरकार को खूब घेरा, सामान्य चर्चा से बात आगे निकलकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप तक पहुंची

स्पीकर ने विपक्ष के आरोप को झुठलाया, कांग्रेस को बोलने का पूरा दिया मौका
पहाड़ का सच देहरादून। गैरसैंण बजट सत्र में विपक्ष(कांग्रेस )कई मुद्दों पर सरकार पर हमलावर दिखी। कई मंत्रियों का अधूरा होमवर्क भी दिखाई दिया जिससे विपक्ष को सरकार की नीतियों और रीतियों का विरोध करने का भरपूर मौका मिला।
सदन में चर्चा के दौरान मुद्दों पर विपक्ष को बोलने का स्पीकर ने पूरा मौका दिया। गैस सिलिंडर की कमी व कालाबाजारी के मुद्दे पर स्पीकर के आदेश (विनिश्चय) के बाद भी संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल का जवाब कांग्रेस को संतुष्ट नहीं कर पाया। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने रसोई गैस को केंद्र का विषय बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की लेकिन आर्य, प्रीतम, निजामुददीन, अनुपमा रावत, हरीश धामी समेत सभी ने संसदीय कार्य मंत्री के वक्तव्य पर जमकर हल्ला बोला।
इस दौरान स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी भी सरकार की ओर से जवाब नहीं आने की बात कह गईं। इससे बैकफुट पर आए सत्ता पक्ष असहज हुआ ।हालांकि, मंत्री सौरभ बहुगुणा व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने मुकाबला करने की कोशिश की किंतु कांग्रेस के आक्रमण के आगे मुन्ना व सौरभ भी एक सीमा से आगे नहीं बढ़ पाए।
कांग्रेस ने सदन में तत्काल अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए स्पीकर से ही उनका विनिश्चय वापस लेने की मांग कर दबाव बढ़ा दिया। स्पीकर ने भी कह दिया कि वे अपना आदेश वापस नहीं लेंगी। सरकार जवाब दे। इसके बाद सुबोध उनियाल असहज दिखे। सरकार कहती रही कि LPG केंद्र का विषय है। चर्चा नहीं हो सकती लेकिन कांग्रेस ने रसोई से जुड़े इस ताजे संकट पर सरकार को खूब घेर दिया। हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने भोजनावकाश के बाद 3 बजे शुरू हुए सदन की कार्यवाही को 4 बजे तक स्थगित कर दी।
बजट सत्र में सत्ता पक्ष की लापरवाही पर स्पीकर ने बेबाक राय रख दी। स्पीकर ने भाजपा के कम सदस्यों की मौजूदगी (सम्भवतः ग्यारह सदस्य) पर भी नाराजगी दिखाई।
कांग्रेस ने मौके को लपकते हुए कह दिया कि सदन में सरकार अल्पमत में है। अगर विनियोग विधेयक के समय सत्ता पक्ष के विधायक गैरहाजिर होते तो धामी सरकार गहरे संकट में फंस जाती। सत्र के चौथे दिन सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट बुरी तरह गड़बड़ाया। संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल विपक्ष के विशेष निशाने पर हैं।
उनियाल की काजी निजामुददीन पर कुपोषण सम्वन्धी टिप्पणी भी खूब वॉयरल हो रही है। बहरहाल, गैरसैंण के बजट सत्र में स्पीकर ऋतु खण्डूडी ने कांग्रेस को बोलने का मौका देकर पुराने आरोप से छुटकारा पा लिया।
गैरसैंण को वेडिंग डेस्टिनेशन बनाए जाने के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान से सरकार को सदन के भीतर व सदन के बाहर फजीहत झेलनी पड़ी। कांग्रेस के तीव्र विरोध को देखते हुए महाराज को सदन में सफाई देनी पड़ी जो लगभग माफी की शक्ल में थी। जैविक खेती पर कृषि मंत्री गणेश जोशी भी विपक्ष के सवालों से घिरते नजर आए।
सत्र के पांचवें विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में एक प्रोजेक्ट्स को लेकर कांग्रेस सदस्य प्रीतम सिंह और भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान के बीच सामान्य चर्चा तीखी झड़प में तब्दील हो गई। नौबत एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप तक पहुंच गई। ऐसा नहीं कि पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में सदन में आरोप प्रत्यारोप या तीखी बहस नहीं होती थी। यहां उन सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करना उचित होगा जिसमें संसदीय कार्य मंत्री स्व. डा.इंदिरा हृदयेश व स्व. प्रकाश पंत रहे।
उनके संसदीय कार्यकाल सदन में यदि विभागीय मंत्री की तरफ से कमजोरी दिखती थी तो संसदीय कार्य मंत्री माकूल जवाब देकर सदन में उभयपक्षों को संतुष्ट कर देते थे। उनके संपूर्ण कार्यकाल में ऐसा एक भी ऐसी टिप्पणी देखने को नहीं मिली ,जैसी इस सत्र में कांग्रेस सदस्य काजी निजामुद्दीन के एक प्रसंग पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने की।
सदन से अधिकांश विधायक नदारद, स्पीकर नाराज
सदन की कार्यवाही के दौरान सदस्यों के सदन से नदारद रहने की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है। बजट सत्र में लगातार ऐसी स्थिति को देख विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने विधायकों के सदन में मौजूद न रहने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सदस्यों का ऐसा रवैया ठीक नहीं।
वाकया शुक्रवार का है। दरअसल, शून्यकाल के दौरान विपक्ष के विधायक नियम 58 की सूचनाएं दे रहे थे। स्पीकर ने विपक्ष के दो विधायकों ने नाम लिए तो वह जो सदन में मौजूद नहीं थे। कुछ देर बाद विधायक सदन में पहुंचे तो उन्होंने अपनी सूचनाएं लेने का अनुरोध किया। इस पर स्पीकर नाराज हो गईं। उन्होंने कहा कि सदस्यों को सदन में मौजूद रहना चाहिए। पिछले दो दिनों में भी सत्ता पक्ष के कई विधायकों के सदन में न होने पर स्पीकर ने नाराजगी जताई थी।
उन्होंने विधायकों से समय पर सदन में पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन शुक्रवार को एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों को नसीहत देनी पड़ी है। इससे पहले स्पीकर सदन के सदस्यों को सदन के भीतर अफसरों से बात करने के लिए भी टोक चुकी हैं। पूर्व में सदन में तो कई विधायक फोन पर बात करते हुए देखे गए थे जिस पर स्पीकर ने सदन के भीतर फोन के उपयोग पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए थे।
सवाल पूछने में ये विधायक सबसे आगे रहे। इनमें महेश जीना, संजय डोभाल, प्रीतम पंवार, बृजभूषण गैरोला, में राम सिंह कैड़ा,सुमित हृदयेश,आशा नौटियाल, सुरेश गड़िया।
