
निदेशक पर जानलेवा हमले व आशा रोड़ी में कर्मियों से मारपीट की निंदा
पहाड़ का सच, देहरादून । उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने वन विभाग के आशारोड़ी रेंज कार्यालय में वन विकास निगम के कर्मचारियों एवं ननूरखेड़ा में भाजपा विधायक उमेश शर्मा की अगुवाई में प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए जानलेवा हमले पर कहा कि भाजपा शासन में जिस प्रकार सरकारी कार्यालयों, अधिकारियों व कर्मचारियों पर प्रायोजित हमले हो रहे हैं उससे प्रदेश की कानून व्यवस्था के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था भी ध्वस्त हो रही है।
मीडिया को जारी एक बयान में पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के शासन में भू-माफिया, शराब माफिया और खनन माफिया हाबी हो चुके हैं तथा इन सभी को सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त है। राज्य में माफिया, असामाजिक तत्वों तथा अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त हो चुका है। राज्य की राजधानी देहरादून में सरेआम पुलिस की नाक के नीचे हत्यायें हो रही हैं तथा भाजपा विधायक के नेतृत्व में अपराधी तत्व और गैगस्टर सरकारी कार्यालयों में पहुंचकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मारपीट कर रहे हैं यह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने देहरादून में आशारोडी में वन विभाग के कर्मियों तथा प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक पर भाजपा विधायक के नेतृत्व में हुए हमले को अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा कि सत्तारूढ दल के विधायक के नेतृत्व में जिस प्रकार शिक्षा विभाग के अधिकारी पर हमला हुआ है उसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जनसेवा में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर इस प्रकार की हिंसक घटनाएँ किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय का नाम परिवर्तित किया जाना किसी अधिकारी के हाथ में नहीं है यह निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाता है। सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी कानून के दायरे में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उन पर हमला न केवल व्यक्तियों की सुरक्षा पर आघात है, बल्कि शासन व्यवस्था, प्रशासनिक मनोबल और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा प्रहार है। ऐसी घटनाएँ समाज में भय और अराजकता का वातावरण ही उत्पन्न करती हैं।
गोदियाल ने इन घटनाओं की कड़ी भर्त्सना करते हुए राज्य की धामी सरकार से मांग की है कि इन दोनों घटनाओं के दोषियों की तत्काल पहचान कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी, ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

