
अन्न भंडारण, क्रेडिट प्रणाली और डिजिटल विस्तार पर रहेगा विशेष जोर
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण को बनेगी ठोस रणनीति
पहाड़ का सच। गुजरात/देहरादून। उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने अपने गुजरात प्रवास के दौरान आज गांधीनगर में सहकारिता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर संस्थानों के कार्यकलापों, अन्न भंडारण व्यवस्था, बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल विस्तार और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं के बारे में जानकारी ली।

मीडिया को जारी बयान में डाॅ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए गुजरात के सफल सहकारिता मॉडल को अपनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में सहकारी संघों, बैंकों व समितियों में आधुनिक प्रबंधन प्रणाली, वैज्ञानिक अन्न भंडारण, पारदर्शी क्रेडिट व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विशेष फोकस कर सहकारिता आंदोलन को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाये जायेंगे।

आधुनिक अन्न भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण
गुजरात प्रवास के दौरान डाॅ. रावत ने बुधवार को गांधीनगर स्थित सरढव सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड के पीएम श्री अन्न भंडारण केंद्र का निरीक्षण किया। जहां उन्होंने वैज्ञानिक व सुरक्षित भंडारण व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रणाली किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे किसानों की आय वृद्धि और खाद्य सुरक्षा के लिए प्रभावी मॉडल बताया।
वित्तीय व क्रेडिट प्रणाली की ली जानकारी
डाॅ. रावत ने गांधीनगर जिला सहकारी संघ तथा जिला सहकारी ऋण समिति लिमिटेड का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने समिति के पारदर्शी प्रबंधन, क्रेडिट प्रणाली और वित्तीय समावेशन की योजनाओं की जानकारी अधिकारियों से ली। अपने भ्रमण के दौरान डाॅ. रावत ने जिला सहकारी संघ गांधीनगर के अध्यक्ष कोदरभाई आर पेटल से मुलाकात की और सहकारिता के विभिन्न आयामों, योजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान डाॅ. रावत ने उत्तराखंड में संचालित विभिन्न सहकारी योजनाओं का जानकारी भी साझा की।
डाॅ. रावत ने कहा कि सहकारिता सामाजिक समरसता, सामूहिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। गुजरात के प्रेरणादायी अनुभवों से सीख लेकर उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास, वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।
गुजरात का सहकारिता मॉडल: (अमूल पैटर्न) डेयरी, कृषि और ऋण के क्षेत्र में छोटे उत्पादकों को जोड़कर, बिचौलियों को हटाकर, सीधे बाजार तक पहुंच और लाभांश दिलाने की एक सफल स्व-सहायता प्रणाली है। यह मॉडल प्रजातांत्रिक प्रबंधन, महिला सशक्तिकरण और ‘सहकार से समृद्धि’ (सहकारी संघवाद) पर आधारित है, जो भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बना हुआ है।

गुजरात सहकारिता मॉडल की प्रमुख विशेषताएं:
मूल संरचना (अमूल पैटर्न): इसमें दुग्ध उत्पादक सदस्य (ग्राम स्तर) – जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (जिला स्तर) – राज्य विपणन संघ (राज्य स्तर) का एक त्रि-स्तरीय ढांचा है, जो उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक की जिम्मेदारी संभालता है।
सफलता का आधार: सबसे महत्वपूर्ण डेयरी सहकारी समितियां (16,319+) हैं, जिसमें 36 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हैं। यह मॉडल ग्रामीण आय में वृद्धि और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाता है (32% से अधिक सदस्य महिलाएं हैं)।
विविधता: यह मॉडल केवल डेयरी तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि ऋण (PACS), आवास समितियां, चीनी मिलें और मत्स्य पालन तक फैला हुआ है।
पारदर्शिता और .आधुनिकता: सहकारी संघों (PACS) का कम्प्यूटरीकरण, ‘सहकार से समृद्धि’ और ‘सहकारिता में सहकार’ के मंत्र के साथ बैंक खातों को जिला सहकारी बैंकों से जोड़ना प्रमुख है।
महिला सशक्तिकरण: गुजरात में 2025 तक महिलाओं द्वारा संचालित समितियों की संख्या और उनकी आय में भारी वृद्धि हुई है, जो महिला सशक्तीकरण की एक प्रमुख मिसाल है।
गुजरात मॉडल क्यों अलग है?
यह निजी कॉरपोरेट व्यवस्था के विपरीत, लाभ का समान वितरण और निर्णय लेने में सदस्यों की भागीदारी (प्रजातांत्रिक प्रबंधन) सुनिश्चित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीब और सीमांत किसानों का उत्थान करना है।

