
पिथौरागढ़। जिले पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में बसे घरुड़ी और मनकोट ऐसे ही गांव हैं। यहां के करीब 300 ग्रामीण आज भी जान जोखिम में डालकर तार पर लटकती ट्रॉली (गरारी) के सहारे गोरी नदी को पार करते हैं। पुल न होने के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को रोजाना नदी के ऊपर लटककर सफर करना पड़ता है। अब तक इस ट्रॉली से गिरकर तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। उसके बाद भी हाल जस के तस बने हुए हैं।
बताते चलें कि साल 2013 की भीषण आपदा में यहां बना झूला पुल बह गया था। जिसके बाद इन गांवों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया। राहत के तौर पर लगाई गई ट्रॉली पिछले 12 सालों से ग्रामीणों की जीवनरेखा बनी हुई है। स्थायी पुल अब तक नहीं बन सका है। घरुड़ी और मनकोट तोक गोरी नदी के उस पार बसे हैं। नदी पार किए बिना ग्रामीणों का संपर्क बाहरी दुनिया से नहीं हो पाता है।
राशन, दवा, स्कूल, बाजार और सरकारी कामकाज, हर जरूरत के लिए लोगों को इसी ट्रॉली का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण यह सफर और भी भयावह हो जाता है। विकल्प न होने के कारण ग्रामीणों को जोखिम उठाना ही पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश में जब तक सुरक्षित दूसरी ओर नहीं पहुंच जाते, तब तक परिवार के लोग चिंतित रहते हैं। उन्हें नहीं पता कब तक इस तार के सहारे जीवन का यह जोखिम भरा सफर जारी रहेगा। अगर समय रहते यहां पर यहां पुल नहीं बना तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

