
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌤️ *दिनांक – 05 फरवरी 2026*
🌤️ *दिन – गुरूवार*
🌤️ *विक्रम संवत 2082*
🌤️ *शक संवत -1947*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ॠतु*
🌥️ *अमांत – 23 गते माघ मास प्रविष्टि*
🌥️ *राष्ट्रीय तिथि – 15 माघ मास*
🌤️ *मास – फाल्गुन ( गुजरात-महाराष्ट्र -माघ )*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – चतुर्थी रात्रि 12:22 तक तत्पश्चात पंचमी*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तराफाल्गुनी रात्रि 10:57 तक तत्पश्चात हस्त*
🌤️ *योग – सुकर्मा रात्रि 12:04 तक तत्पश्चात धृति*
🌤️ *राहुकाल – दोपहर 01:52 से शाम 03:12 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:16*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:56*
👉 *दिशाशूल – दक्षिण दिशा मे*
🚩 *व्रत पर्व विवरण- संकष्ट चतुर्थी (चंद्रोदय: रात्रि 09:39)*
💥 *विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *गुस्से का उपयोग* 🌷
😡 *गुस्सा आये तो गुस्से को देखो, गुस्से में तपो मत, गुस्से का उपयोग करो, सामने वाले का अहित ना करो ।*
🙏🏻 *बड़ों पर गुस्सा आये तो उनके चरणों में मत्था टेक दो………कि माफ़ कर दो हमें आप पर गुस्सा आ रहा है। ऐसा मन में भी कर सकते हैं। बड़ों के आगे अहम् पिघला दो । अथवा तो ईश्वर के चरणों में मत्था टेक दो कि हमें बड़ों पर गुस्सा आ रहा है…….आप ही संभालो। अहम् में ही गुस्सा आता है ।*
👉🏻 *एक घूंट पानी की मुंह में डाल दो । धीरे-धीरे पानी को नीचे उतरने दो । गुस्से की गर्मी, पित्त शांत हो जायेगा ।*
😡 *गुस्सा आया तो हाथ की उँगलियों के नाखून हाथ की गद्दी पर लगे, ऐसे मुट्ठी बंद कर लो । गुस्सा आया है तो ज्ञान स्वरुप ईश्वर की सत्ता से जान रहा हूँ, ऐसा विचार करते हुए, गुस्से का उपयोग करें ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *नौकरी धंधा सेट ना होता हो तो* 🌷
👉🏻 *नौकरी धंधा ना मिलता हो,सेट ना होता हो तो इतवार को नमक बिना का खाना खाएं|*
🏡 *घर से आर्थिक परेशानी भागने लगेगी| बीमारी नहीं टिकेगी|*
👉🏻 *इतवार के दिन सिर या शरीर में तेल नहीं लगायें|*
🌞 *सूर्यदेव को जल देकर ही कुछ खाएं-पियें |*
🙏🏻सूर्य देव को जल (अर्घ्य) देना हमारी सनातन परंपरा में आस्था, विज्ञान और स्वास्थ्य—तीनों का सुंदर मेल है। मान्यता है कि सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं, इसलिए उन्हें जल अर्पित करने से तुरंत सकारात्मक प्रभाव मिलता है।
🌞 सूर्य देव को जल क्यों दिया जाता है?
ऊर्जा का स्रोत: सूर्य जीवन, प्रकाश और प्राणशक्ति के मूल स्रोत हैं।
कृतज्ञता: जल अर्पण के जरिए हम प्रकृति और जीवन के प्रति धन्यवाद प्रकट करते हैं।
ध्यान और अनुशासन: रोज़ सुबह का यह कर्म मन को एकाग्र और दिनचर्या को सुदृढ़ बनाता है।
✨ सूर्य देव को जल देने के फायदे
🧠 मानसिक लाभ
मन शांत रहता है, तनाव और नकारात्मकता कम होती है
एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है
💪 शारीरिक लाभ
सुबह की धूप से विटामिन का अवशोषण
आँखों की रोशनी और प्रतिरोधक क्षमता में सहायक
सुस्ती दूर होकर ऊर्जा और ताजगी मिलती है
🔮 आध्यात्मिक/ज्योतिषीय लाभ
कुंडली में सूर्य मज़बूत होता है
मान-सम्मान, नेतृत्व और सफलता में वृद्धि
पितृ दोष और ग्रह-दोषों में शांति की मान्यता
🙏 सूर्य को जल कैसे दें (सही तरीका)
समय: सूर्योदय के समय
पात्र: तांबे का लोटा (श्रेष्ठ माना जाता है)
दिशा: पूर्व की ओर मुख
मंत्र (ऐच्छिक):
“ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः”
जल को पतली धार में इस तरह छोड़ें कि धूप की किरणें जल से होकर आँखों पर पड़ें (सीधे सूर्य को घूरना नहीं)
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
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