
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩*~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 19 जनवरी 2026*
🌤️ *दिन – सोमवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – शिशिर ऋतु*
🌥️ *अमांत – 6 गते माघ मास प्रविष्टि*
🌥️ *राष्ट्रीय तिथि – 29 पौष मास*
🌤️ *मास – माघ*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – प्रतिपदा 20 जनवरी रात्रि 02:14 तक तत्पश्चात द्वितीया*
🌤️ *नक्षत्र – उत्तराषाढा सुबह 11:52 तक श्रवण*
🌤️ *योग – वज्र रात्रि 08:45 तक तत्पश्चात सिद्धि*
🌤️ *राहुकाल – सुबह 08:35 से सुबह 09:52 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 07:13*
🌤️ *सूर्यास्त – 05:42*
👉 *दिशाशूल – पूर्व दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
💥 *विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा पेठा) न खाएं क्योकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
💥 *विशेष ~ व्यतीपात योग – 20 जनवरी 2026 मंगलवार को रात्रि 08:01 से 21 जनवरी, बुधवार को शाम 06:58 तक व्यतिपात योग है।🚩*~ सनातन पंचाग ~*🚩
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