
– रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर और गोपेश्वर में बाजार रहे बंद

– कई जगह बंद से अलग रहे व्यापारी संगठन
– अंकिता हत्याकांड को लेकर विभिन्न संगठनों का प्रदर्शन
पहाड़ का सच देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में आयोजित बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। पर्वतीय क्षेत्रों में बंद का प्रभाव अधिक नजर आया, जबकि मैदानी जिलों में यह आंशिक रूप से सफल रहा। विभिन्न सामाजिक संगठनों के आह्वान पर हुए बंद को कांग्रेस, वामपंथी दलों और उत्तराखंड क्रांति दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन प्राप्त था।
बंद के दौरान कई शहरों में आक्रोशित लोगों ने न्याय की मांग को लेकर जुलूस निकाले और प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर न्याय, दोषियों को कड़ी सजा और निष्पक्ष जांच की मांग लिखी हुई थी। शांतिपूर्ण माहौल में हुए इन कार्यक्रमों से जनभावनाओं का प्रदर्शन भी हुआ।

रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर, गोपेश्वर और गोपेश्वर में बाजार पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। बाजार बंद होने से लोगों को दैनिक जरूरतों का सामान खरीदने में दिक्कतें आईं। दवाइयों, राशन और सब्जियों के लिए लोगों को वैकल्पिक दुकानों की तलाश करनी पड़ी। .दूरदराज से आए ग्रामीणों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और दिहाड़ी मजदूरों की आय प्रभावित हुई। हालांकि अस्पताल, एंबुलेंस, पानी और बिजली जैसी आवश्यक सेवाएं सामान्य रहीं, जिससे राहत मिली।
देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों में बंद का असर सीमित रहा। यहां कई बाजार खुले रहे और यातायात भी सामान्य बना रहा। कुमाऊं मंडल के अधिकांश जिलों में भी बंद लगभग बेअसर दिखाई दिया। .व्यापारी संगठनों ने पहले ही इससे दूरी बना ली थी, इसलिए कई स्थानों पर दुकानें खुली रहीं। बंद के माध्यम से संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाया कि न्याय प्रक्रिया में कोई ढिलाई न हो। लोगों ने दोहराया कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिलेगा तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

प्रशासन ने किए थे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जिलों में प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए थे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, चौराहों पर निगरानी बढ़ाई गई और जुलूसों के साथ समन्वय रखा गया। प्रशासन की सतर्कता से कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और अनुशासन के साथ संपन्न हुए।
