
– श्री देव भूमि इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन साईंस एण्ड टैक्नोलॉजी, पौंधा देहरादून में “Implementation of AEBAS” एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

– राज्य के 103 संस्थानों ने भाग लिया
पहाड़ का सच देहरादून। श्री देव भूमि इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन साइंस एण्ड टैक्नोलॉजी, पौंधा संस्थान देहरादून में बुधवार को “Implementation of AEBAS” पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में जस्सुभाई हीराभाई ने चौधरी, उपाध्यक्ष, भारतीय भेषजी परिषद (Pharmacy and Council of India) नई दिल्ली और डॉ विभु साहनी, सेंट्रल काउंसिल मेंबर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली एवं अध्यक्ष फाइनेंस कमेटी पीकीसीआई, नई दिल्ली एवं विभागाध्यक्ष एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ और डॉ शिवानंद पाटिल, सेंट्रल काउंसिल मेंबर पीसीआई नई दिल्ली एवं संस्थान के अध्यक्ष श्रीनिवास नौटियाल द्वारा सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
उक्त कार्यक्रम में सम्पूर्ण उतराखण्ड राज्य के लगभग 103 कॉलेज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि जस्सुभाई हीराभाई चौधरी, उपाध्यक्ष, भारतीय भेषजी परिषद (Pharmacy Council of India) नई दिल्ली ने अपने भाषण में कहा कि AEBAS केवल एक उपस्थिति दर्ज करने वाली प्रणाली नहीं है बल्कि यह ई’गवर्नेंस और गुड गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें तकनीक का उपयोग करते हुए अपने प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना होगा उन्हानें बताया कि पूर्व में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली का रोल केवल निरीक्षण करना एवं मान्यता देना था तथा वर्तमान में उन्होने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में कुछ परिवर्तन किये जिसमें उन्होने स्क्लि डेवलपमेंट इन क्वालिटी कंट्रोल तथा स्क्लि डेवलपमेंट इन एआई जैसे प्रोग्राम को भी प्रारंभ कर रहे हैं।

इसी काम को आगे जारी रखने के लिये फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली प्रत्येक राज्य के स्टेट काउंसिल को 1 करोड़ देने की बात कही। जैसा कि आज के दौर में एआई बहुत महत्वपूर्ण हो गया है उस क्रम में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली ने अपने कार्यालय में एक फ्लोर केवल एआई की ट्रेनिंग के लिये तैयार किया है जिसमें शिक्षकगण एआई के बारे में ट्रेनिंग ले सकते है।
उन्होनें बताया कि पहले इंस्टीटयूटस को सीधे फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से सम्पर्क करना मुश्किल होता था। इसीलिये फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली ने इसका समाधान कर कुल 4 जोन बनाये जिसमें उतर प्रदेश, उतराखण्ड, मध्य प्रदेश एवं छतीसगढ़ तथा 3 को ऑर्डिनेटर भी बनाये गये हैं। इनमें डॉ0 रेनु, डॉ शिवानंद पाटिल, डॉ विभु साहनी शामिल है।
डॉ विभु साहनी, सेंट्रल काउंसिल मेंबर फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली एवं विभागाध्यक्ष एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ ने अपने भाषण में कहा कि AEBAS को जल्द से जल्द अपने संस्थान में लागू करें। इन सबकी शुरुआत करके हमको फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के लिए दिशा निर्देश का पालन करना है।

उन्होने यह भी बताया कि AEBAS को लागू करने का मुख्य कारण यह है कि फार्मेसी में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के परीक्षण प्रोग्राम में प्रतिभाग करे ताकि इंस्टीटयूट के स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके अतिरिक्त उन्होनें बताया कि AEBAS को लागू करने से एजुकेशन का स्तर बढ़ जायेगा।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने AEBAS के लाभ तथा इससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला AEBAS का मुख्य लाभ पारदर्शिता और सटीकता है। जो उपस्थिति रिकॉर्ड में मानवीय त्रुटियों और हेराफेरी की गुजाइश को समाप्त करता है। यह बायोमेट्रिक सत्यापन के कारण फर्जी उपस्थिति पर पूर्ण रोक लगाता है। इस दौरान AEBAS की ऑनलाइन ट्रेनिंग सीधे हैड ऑफिस, नई दिल्ली से की गई।
कार्यशाला में उपस्थित सभी सदस्यों की आशंकाओं को भी दूर किया गया। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली ने उतराखण्ड राज्य के सभी संस्थानों को AEBAS System को 100 प्रतिशत लागू करने के भी निर्देश दिये। साथ ही उच्च अधिकारियों को रियल-टाइम निगरानी और बेहतर संसाधन प्रबंधन में सहायता करता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्वीकार किया कि नेटवर्क और कनेक्टिविटी, कुछ मामलों में बायोमेट्रिक विफलता, उपकरणों का रखरखाव, और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता जैसी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिन्हें प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों से दूर किया जा सकता है।
यह स्पष्ट किया गया कि AEBAS के पूर्ण कार्यान्वयन से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जैसे कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच जवाबदेही (Accountability) की भावना में वृद्धि, कार्यालयों में अनुशासित कार्य संस्कृति और समय की पाबंदी को बढ़ावा, तथा प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार। इस दौरान, कार्यशाला में AEBAS सॉफ्टवेयर इंटरफेस का डेमो, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल, और बायोमेट्रिक डिवाइस के ट्रबलशूटिंग पर विशेषज्ञ सत्र शामिल थे। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि AEBAS डेटा पूरी तरह से सुरक्षित है और आधार पारिस्थितिकी तंत्र के सख्त सुरक्षा और गोपनीयता मानकों का पालन करता है।
कार्यशाला के अंत में मुख्य अतिथियों ने सभी संस्थानों से आये प्रतिनिधियों तथा हमारे संस्थान के फार्मेसी पाठयक्रम के शिक्षकों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया।
संस्थान के अध्यक्ष श्रीनिवास नौटियाल तथा निदेशक डॉ शिवानन्द पाटिल द्वारा कार्यशाला में उपस्थित मुख्य अतिथि एवं सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद किया गया।
