
पिथौरागढ़। जनपद के धारचूला के कनार गांव में प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को डोली से 16 किलोमीटर दूर बरम पहुंचाया। खराब मौसम में उबड़-खाबड़ रास्ते से यह दूरी तय करने में युवाओं को पांच घंटे से अधिक का समय लग गया।

बताते चलें कि पिथौरागढ़ जिले के कनार गांव तक सड़क नहीं है। जब भी गांव का कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या गर्भवती को प्रसव पीड़ा होती है तो उनके लिए डोली ही एंबुलेंस बनती है। गांव के युवा कंधों पर डोली उठाकर मरीजों को 16 किलोमीटर दूर बरम पहुंचाते हैं, जहां से उन्हें 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाया जाता है।
कनार गांव निवासी गणेश सिंह की पत्नी हेमा देवी 24 वर्ष को प्रसव पीड़ा हुई। लगातार बारिश के कारण घरों से बाहर निकलना आसान नहीं था। इसके बावजूद युवाओं ने हेमा देवी को प्रसव के लिए एएनएम सेंटर बरम ले जाने का निर्णय लिया। युवाओं ने हेमा देवी के लिए एक डोली तैयार की। इसके बाद चार युवा डोली को कंधों पर उठाकर बरम के लिए रवाना हुए। डोली में दर्द से कराहती गर्भवती और फिसलन भरे रास्ते में युवाओं को एक-एक कदम चलने में काफी परेशानी उठानी पड़ी।
पांच घंटे तक कठिन मार्ग से चलकर युवाओं ने आखिरकार हेमा देवी को बरम पहुंचा ही दिया। हेमा देवी को एनएनएम सेंटर में भर्ती किया गया, जहां पर उसका सुरक्षित प्रसव किया गया। बरम से लेकर बंगापानी तक ऐलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. बरम में भी उपचार के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल ही है. विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से अधिकांश मामलों में प्रसव के लिए गर्भवतियों को 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है।
कनार पिथौरागढ़ जिले का ऐसा गांव है, जहां के लिए सड़क नहीं है. यहां के लोग सड़क के लिए लगातार मांग उठा रहे हैं. सड़क बनने में वन भूमि आड़े आ रही है. क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन प्रशासन से सड़क का निर्माण करने के लिए गुहार लगाई है. उनका कहना है कि वह कब तक ऐसा जीवन जियेंगे. चार दिन पूर्व अपनी सड़क की मांग को लेकर पिथौरागढ़ पहुंचे कनार के ग्रामीणों को जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने आश्वासन दिया है. डीएम ने इस मामले में डीएफओ की मौजूदगी में ग्रामीणों के साथ चर्चा की थी.
