
चुनावी वर्ष में नए चेहरों के सामने परफार्मेंस की भी रहेगी चुनौती
समय को देखते हुए जल्द ही बंट सकते हैं पोर्टफोलियो, सीएम का वजन होगा कम
हरीश जोशी/पहाड़ का सच

देहरादून। आलोचक अथवा कुछ समालोचक बेशक धामी मंत्रिमंडल में विस्तार को देर में लिया गया फ़ैसला मानते हों लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान में ” कुर्सी ” की चाह रखने वालों के लिए कैबिनेट विस्तार ” देर आए दुरुस्त आए ” वाली कहावत पर फिट बैठता है। चर्चा में रहे कुछ चेहरों को बेशक निराश होना पड़ा हो, लेकिन धामी कैबिनेट में जिन नए चेहरों को शामिल किया गया है उससे भावी चुनावों में सत्ता संतुलन के साथ जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की चातुर्यता झलक रही है। माना जा रहा है कि सुखद फायदे के रूप में भाजपा को विधानसभा चुनाव ने इसका फलित मिल सकता है।

करीब चार साल के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुक्कमल मौका देखते हुए अपनी कैबिनेट का आकार पूरा कर लिया है। इससे पहले सीएम धामी पहले सात और एक साल से मंत्रिमंडल के छह सहयोगियों के साथ सरकार चला रहे थे। मंत्रिमंडल के छोटे आकार के बाद भी मुख्यमंत्री धामी ने कुछ ऐसे फ़ैसले लिए जिससे उनकी पार्टी व केंद्र सरकार में एक कुशल प्रशासक की छवि बन गई। नतीजतन, मुख्यमंत्री की कुर्सी हो या कैबिनेट विस्तार के लिए बढ़ता अंदरूनी दबाव अपना असर नहीं दिखा पाया। इस बीच समय समय पर कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं आम होती रही। .
अगले साल महाकुंभ को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि इस साल दिसंबर में राज्य विधानसभा चुनावों की घोषणा हो जाए। इसी अनुमान से ये अटकलें लगाई जा रही थी कि शायद इतने कम समय के लिए धामी कैबिनेट का विस्तार न हो। ये सभी अटकलें निर्मूल साबित हुईं और नवरात्र के अवसर पर शुक्रवार को धामी कैबिनेट में दो पूर्व मंत्रियों मदन कौशिक(हरिद्वार), खजान दास(देहरादून) , रुड़की से प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी व भीमताल से राम सिंह कैडॉ मंत्रिमंडल में शामिल हुए।
खंडूड़ी, निशंक व त्रिवेंद्र सरकार में मंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे मदन कौशिक लंबे समय से प्रतीक्षा में थे। कौशिक की संगठन में मजबूत पकड़ होने के साथ ब्राह्मणों में अच्छी पैठ है। दूसरा,वो पिछले कई चुनाव जीतते आ रहे हैं। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर हरिद्वार सहित मैदानी मूल के ब्राह्मणों को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। भाजपा मदन को मैदानी लीडर के रूप में भी देखती है।

दूसरे मंत्री खजान दास मूल रूप से उत्तरकाशी जिले के रहने वाले हैं और पिछले दो चुनाव देहरादून की राजपुर आरक्षित सीट (अनुसूचित जाति) से जीत चुके हैं। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर उत्तरकाशी सहित देहरादून के अनुसूचित जाति के मतदाताओं को संतुष्ट करने की कोशिश की गई है। साथ ही आगामी चुनाव में उनका टिकट पक्का होने के संकेत देकर वर्ग विशेष को भरोसे में लेने का प्रयास किया गया है। .तीसरे मंत्री बने प्रदीप बत्रा हरिद्वार की रुड़की विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। बत्रा पंजाबी समुदाय से हैं। राज्य के तीन जनपदों देहरादून, हरिद्वार व उधम सिंह नगर में पंजाबी समाज के लोगों की संख्या बहुतायत में है।
भाजपा इस फैक्टर को विधानसभा चुनाव के अलावा लोकसभा चुनाव के रूप में भी देख रही है। चौथे मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले रुद्रप्रयाग के विधायक भरत चौधरी पुराने नेता हैं और उनका दोनों जिलों रुद्रप्रयाग और चमोली की राजनीति में दबदबा है। चौधरी कांग्रेस में भी रहे और त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रतिनिधित्व कर आगे बढ़े हैं।
राजनीतिक रूप से सशक्त माने जाने वाले नैनीताल जिले को अभी धामी वन और अब तक धामी टू सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। जिले की भीमताल सीट से विधायक राम सिंह कैड़ा को मंत्री बनाकर जिले की उपेक्षा के आरोप से बचने के अलावा युवाओं को आगे लाने की पहल को दर्शाने का काम किया है।
उम्मीद है कि धामी कैबिनेट में पोर्टफोलियो का नए सिरे से जल्द आवंटन होगा और सीएम धामी का वजन कम होगा। इस समय उनके पास तीन दर्जन के करीब विभागों का दायित्व है। देर सवेरे विभागों का आवंटन हो ही जाएगा, सवाल ये उठता है कि अल्प कार्यकाल में नए मंत्रियों की परफार्मेंस क्या होगी? टिकट वितरण के समय कामकाज का आंकलन भी होगा?
