
कई सालों से लंबित लोकायुक्त नियुक्ति पर सख्त हाईकोर्ट,दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

पहाड़ का सच नैनीताल। उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।

हल्द्वानी के गौलापार निवासी शंकर जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। 18 मार्च को हुई सुनवाई के आदेश की प्रति गुरुवार को जारी की गई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि लोकायुक्त जैसी महत्वपूर्ण संस्था की नियुक्ति में लगातार देरी न केवल कानून के अनुपालन में लापरवाही दर्शाती है, बल्कि शासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है।
हैरानी की बात यह है कि लोकायुक्त कार्यालय पर लगातार खर्च किया जा रहा है लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया अब तक अधूरी है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि इससे पहले भी कई बार राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया, लेकिन हर बार सरकार की ओर से सिर्फ समय ही मांगा गया। अदालत ने विशेष रूप से 25 जून 2025 के उस शपथ पत्र का उल्लेख किया, जिसमें सरकार ने दावा किया था कि लोकायुक्त नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
ताजा सुनवाई में भी राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की जिसे अदालत ने अंतिम अवसर मानते हुए स्वीकार किया। हाईकोर्ट ने अब सरकार को दो सप्ताह के भीतर पूरी प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को तय की गई है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। यदि तब तक सरकार स्पष्ट जवाब नहीं दे पाती है, तो अदालत और कड़ा रुख अपना सकती है।
लोकायुक्त की नियुक्ति में हो रही इस लगातार देरी ने प्रदेश में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की प्रतिबद्धता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनहित का बड़ा विषय बन गया है।
उत्तराखंड लोकायुक्त
उत्तराखंड में वर्ष 2013 से लोकायुक्त का पद खाली है, जिससे यह संवैधानिक संस्था पिछले 13 वर्षों से निष्क्रिय पड़ी है। हालांकि, सरकार का दावा है कि अब सर्च कमेटी के माध्यम से नियुक्ति की प्रक्रिया तेज की जा रही है। यह मामला नैनीताल हाई कोर्ट में लंबित है, जिसने सरकार को जल्द से जल्द नियुक्ति के आदेश दिए थे। इस मामले में 18 मार्च को सुनवाई हुई है।
उत्तराखंड लोकायुक्त से संबंधित मुख्य बातें:
स्थिति: 2013 से लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। वर्तमान में यह पद खाली है।
इतिहास: 2002 में गठन के बाद पहले लोकायुक्त सैयद रजा अब्बास और दूसरे एमएम गिल्डियाल (2008-2013) थे।
हाईकोर्ट का दखल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति में देरी पर नाराजगी जताई है और सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं।
2025-26 में सरकार द्वारा सर्च कमेटी गठित करने और कानूनी प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई है।
दायरा: 2014 के अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
मुख्य मुद्दे:
13 वर्षों से खाली पद के कारण उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली यह सर्वोच्च संस्था केवल एक नाम बनकर रह गई है, जिसे ‘सफेद हाथी’ भी कहा जा रहा है।
