
(25 अप्रैल 1919 – 17 मार्च 1989) उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री (1973-1975) और केंद्रीय मंत्री रहे ‘पहाड़ का बेटा’ के रूप में प्रसिद्ध हेमवती नंदन बहुगुणा एक स्वतंत्रता सेनानी, कुशल प्रशासक और कुशल वक्ता थे. 17 मार्च 1989 को निधन के बाद उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।


हेमवती नंदन बहुगुणा का जीवन और योगदान:
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: बहुगुणा जी का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के बुघाणी गांव में हुआ था. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की जो उनके राजनीतिक जीवन का केंद्र बना.
स्वतंत्रता संग्राम: उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (1942-1946) में सक्रिय भूमिका निभाई और उन्हें जेल जाना पड़ा. अंग्रेजों द्वारा उन पर इनाम भी घोषित किया गया था.
राजनीतिक करियर: 1952 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने. मुख्यमंत्री (UP): 1973 से 1975 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
केंद्रीय मंत्री: केंद्र सरकार में पेट्रोलियम, रसायन और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली.
कार्यशैली और विचारधारा: उन्हें एक साफ-सुथरे और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के पैरोकार के रूप में जाना जाता है. वे लोकतांत्रिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के हिमायती थे. गढ़वाल विश्वविद्यालय उनके की कार्यकाल में खुला था.
निधन और विरासत: उनका निधन 17 मार्च 1989 को अमेरिका (ओहायो) में हुआ उनकी याद में, उत्तराखंड में ‘हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय’ स्थापित किया गया है.
उनकी पुण्यतिथि (17 मार्च) पर पहाड़ का सच परिवार देश व प्रदेशवासियों के साथ उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है.
