
ज्योतिष इंद्रमोहन डंडरियाल

🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌤️ *दिनांक – 17 मार्च 2026*
🌤️ *दिन – मंगलवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2082*
🌤️ *शक संवत – 1947*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – वसंत ऋतु*
⛅ *अमांत – 3 गते चैत्र मास प्रविष्टि*
⛅ *राष्ट्रीय तिथि – 25 फाल्गुन मास*
🌤️ *मास – चैत्र ( गुजरात-महाराष्ट्र-फाल्गुन)*
🌤️ *पक्ष – कृष्ण*
🌤️ *तिथि – त्रयोदशी सुबह 09:23 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
🌤️ *नक्षत्र – शतभिषा 18 मार्च सुबह 06:09 तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
🌤️ *योग – सिद्ध सुबह 08:15 तक तत्पश्चात साध्य*
🌤️*राहुकाल – शाम 03:24 से शाम 04:53 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:26*
🌤️ *सूर्यास्त – 06:24*
👉 *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – मासिक शिवरात्रि, वारुणी योग (सुबह 06:22 से सुबह 09:23 तक)*
💥 *विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *वारुणी योग* 🌷
🙏🏻 *वारुणी योग चैत्र माह में बनने वाला एक पुण्यप्रद महायोग है जिसका वर्णन विभिन्न पुराणों में मिलता है। यह महायोग तीन प्रकार का होता है।*
🙏🏻 *चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को शतभिषा और शनिवार हो तो महावारुणी*
🙏🏻 *चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को वारुण नक्षत्र (शतभिषा) हो तो वारुणी योग (17 मार्च 2026 मंगलवार को (सुबह 06:22 से सुबह 09:23 तक)*
🙏🏻 *चैत्र कृष्ण त्रयोदशी को शतभिषा नक्षत्र, शनिवार और शुभ योग (कुल 27 योगों में से 23वां योग) हो तो महामहावारुणी पर्व होता है।*
🙏🏻 *इस महायोग में गंगा आदि तीर्थ स्थानों में स्नान, दान और उपवास करने से करोड़ों सूर्य ग्रहणों के समान फल प्राप्त होता है।*
🌷 *आइये देखते हैं विभिन्न शास्त्र क्या कहते हैं*
🙏🏻 *भविष्यपुराण के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यदि शनिवार या शतभिषा से युक्त हो तो वह महावारुणी पर्व कहलाता है | इसमें किया गया स्नान, दान एवं श्राद्ध अक्षय होता है।*
🌷 *चैत्रे मासि सिताष्टम्यां शनौ शतभिषा यदि । गंगाया यदि लभ्येत सूर्यग्रहशतैः समा ।।*
*सेयं महावारुणीति ख्याता कृष्णत्रयोदशी । अस्यां स्नानं च दानं च श्राद्धं वाक्षयमुच्यते ।।*
🌷 *नारदपुराण*
*वारुणेन समायुक्ता मधौ कृष्णा त्रयोदशी ।।*
*गंगायां यदि लभ्येत सूर्यग्रहशतैः समा ।। ४०-२० ।।*
🌷 *स्कन्दपुराण*
*”वारुणेन समायुक्ता मधौ कृष्णा त्रयोदशी। गङ्गायां यदि लभ्येत सूर्यग्रहशतैः समा॥*
*शनिवारसमायुक्ता सा महावारुणी स्मृता। गङ्गायां यदि लभ्येत कोटिसूर्यग्रहैः समा॥”*
🌷 *देवीभागवत पुराण*
*”वारुणं कालिकाख्यञ्च शाम्बं नन्दिकृतं शुभम्।*
*सौरं पाराशरप्रोक्तमादित्यं चातिविस्तरम्॥”*
🌷 *त्रिस्थलीसेतु*
*चैत्रासिते वारुणऋक्षयुक्ता त्रयोदशी सूर्यसुतस्य वारे।*
*योगे शुभे सा महती महत्या गंगाजलेर्कग्रहकोटितुल्या।।*
💥 *17 मार्च 2026 मंगलवार को सुबह 06:22 से सुबह 09:23 तक वारुणी योग है ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷
➡️ *18 मार्च . बुधवार को दर्श अमावस्या एवं 19 मार्च गुरुवार को चैत्री अमावस्या है।*
🏡 *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *अमावस्या* 🌷
🙏🏻 *अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है (विष्णु पुराण)*
🚩*~ सनातन पंचांग ~*🚩
🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷
🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*
🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*
🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*
🔥 *आहुति मंत्र* 🔥
🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*
🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*
🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*
🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*
🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*
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🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻मार्च 2026 में पंचक
पंचक शुरू: 16 मार्च 2026 (सोमवार) शाम 6:14 बजे
पंचक समाप्त: 21 मार्च 2026 (शनिवार) सुबह 2:27 बजे
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