
जिलाधिकारी ने बाहरी हस्तक्षेप और हिंसा से लोक सेवकों की सुरक्षा हेतु दिए कड़े निर्देश

पहाड़ का सच चंपावत। राजकीय कार्यस्थलों पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा, बचाव तथा सुव्यवस्थित प्रवेश नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार ने महत्वपूर्ण मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थलों पर बाहरी आक्रामकता, अनावश्यक दबाव अथवा किसी भी प्रकार की हिंसा से लोक सेवकों को भौतिक एवं विधिक रूप से पूर्णतः सुरक्षित रखना है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालयों में एक सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र स्थापित करना प्रशासन की प्राथमिकता है ताकि कर्मचारी निर्भय होकर जनहित के कार्य कर सकें। यह सुरक्षा नीति उत्तराखंड के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में आने वाले समस्त सरकारी कार्यस्थलों, जिनमें निदेशालय, जिलाधिकारी परिसर, खंड विकास कार्यालय, राजकीय शैक्षणिक संस्थान और चिकित्सा संस्थान शामिल हैं, पर प्रभावी रूप से लागू होगी।
हालांकि, जिन उच्च सुरक्षा वाले कार्यालयों जैसे सचिवालय या विधानसभा में पूर्व से ही सुरक्षा व्यवस्थाएं विद्यमान हैं, वहां यह प्रक्रिया लागू नहीं होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि ये सुरक्षा प्रतिबंध और नियम आम जनमानस के साथ-साथ निजी ठेकेदारों, जन प्रतिनिधियों, उनके समर्थकों तथा व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों (PSO) सहित समस्त आगंतुकों पर बिना किसी अपवाद के समान रूप से लागू होंगे। विभाग के सचिव अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर पसारा (PSARA) के अंतर्गत पंजीकृत एजेंसियों से सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर सकेंगे।
सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार अब समस्त स्थायी एवं संविदा कर्मचारियों के लिए मानकीकृत ‘टैम्पर प्रूफ’ पहचान पत्र अनिवार्य रूप से धारण करना होगा। .कार्यालय परिसरों में आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा, केवल आवश्यक सेवाओं या दिव्यांगजन के वाहनों को सघन जांच के उपरांत ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) के माध्यम से जांच सुनिश्चित की जाएगी और सुरक्षा कर्मियों द्वारा सभी व्यक्तियों की शारीरिक जांच (Frisking) अनिवार्य रूप से की जाएगी। विशिष्ट व्यक्तियों के वाहन भी पूर्व अनुमति के आधार पर ही परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
अनुशासन बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि दुर्व्यवहार के दोषी या ब्लैक लिस्टेड व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित करने हेतु सुरक्षा चौकी पर एक औपचारिक “नो-एंट्री” फोटो युक्त पंजिका संधारित की जाए। .कार्यालयों में यथासंभव डिजिटल विज़िटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जाएगा, जहां आगंतुकों की उच्च-रिजॉल्यूशन फोटो और वैध सरकारी पहचान पत्र का सत्यापन कर प्रविष्टि की जाएगी। जहां डिजिटल प्रणाली संभव न हो, वहां भौतिक रजिस्टर में आगंतुक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और आने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। इन कड़े प्रावधानों से सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और अनुशासित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
