
क्षेत्रफल में 900 हेक्टेयर गन्ना कमांड एरिया घटा,

5 वर्षों में 4 लाख कुंतल कम हुई गन्ने की सप्लाई
बड़ी मात्रा में प्रोपर्टी डीलर्स ने काश्तकारों की जमीन कम कीमत पर खरीदी, ऊंचे दाम पर बेची
भू माफिया द्वारा सिंचाई की नहरें और गुलें भी की बंद, बेधड़क हो रही प्लॉटिंग, प्राधिकरण बेखबर
पहाड़ का सच देहरादून। लगातार गन्ना कमांड एरिया घटने से डोईवाला चीनी मिल के अस्तित्व खतरे में है। पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में गन्ने के रकबे में चिंताजनक कमी आई है। इससे मिल प्रबंधन और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इससे बड़ा चिन्ता का
विषय यह भी है कि कई प्रॉपर्टी डीलर्स ने औने पौने कीमत पर जमीन खरीदकर ऊंची कीमत पर जमीनें बेची जा रही हैं। अनाधिकृत प्लॉटिंग की जा रही हैं।

.अनधिकृत रूप से कृषि भूमि पर हो रही प्लाटिंग और भूमि विक्रय के कारण गन्ने का क्षेत्रफल 900 हेक्टेयर (लगभग 10,000 बीघा) तक घट गया है। आंकड़े इस बात गवाह हैं कि पेराई सत्र 2021-22 में 2701 हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती होती थी। वर्तमान सत्र 2025-26 में यह सिमटकर मात्र 1943 हेक्टेयर रह गई है। रकबा घटने का सीधा असर मिल को होने वाली गन्ने की आपूर्ति पर पड़ा है।
सप्लाई में कमी: वर्ष 2021-22 में गन्ना समिति ने मिल को 13.54 लाख कुंतल गन्ना सप्लाई किया था, जो इस वर्ष घटकर केवल 9.07 लाख कुंतल रह गया है।
आर्थिक ढांचा: डोईवाला की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इस मिल पर टिकी है। मिल में लगभग 1000 कर्मचारी कार्यरत हैं और क्षेत्र के 4500 किसान सीधे तौर पर इससे जुड़े हैं।
डोईवाला गन्ना समिति के सचिव गांधी राम के अनुसार, किसानों द्वारा लगातार भूमि बेचे जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। वहीं, ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक गजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि हालांकि प्रति बीघा पैदावार में सुधार हुआ है, लेकिन घटता क्षेत्रफल सबसे बड़ी चुनौती है।
क्षेत्र के बुल्लावाला, झबरा वाला, माजरी ग्रांट, भानिया वाला, दूधली, जॉली ग्रांट, रानीपोखरी और लच्छीवाला जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी डीलरों ने कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर प्लाटिंग कर दी है। कई किसानों ने अपनी पैतृक भूमि बेचकर दूसरे किसानों की जमीनें खरीदीं और वहां भी प्लाटिंग कर मुनाफाखोरी की, जिसका खामियाजा अब खेती और चीनी मिल को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि गन्ने का रकबा इसी तरह घटता रहा और मिल बंद होने की कगार पर आई, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। पहले से ही घाटे में चल रही मिल के लिए गन्ने की यह कमी ‘कोढ़ में खाज’ का काम कर रही है।
“किसानों द्वारा भूमि विक्रय और अनधिकृत प्लाटिंग गन्ना क्षेत्रफल घटने का मुख्य कारण है। यह मिल के भविष्य के लिए चिंताजनक है: गांधी राम, सचिव गन्ना समिति, डोईवाला
वहीं मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि अवैध प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
