
पहाड़ का सच/एजेंसी।

करनाल। हरियाणा के करनाल से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। ये दुखदाई घटना समाज में दिन प्रतिदिन दिन हो रहे खोखलेपन की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो किसी का भी दिल पिघला दे। एक ओर जहां हम तरक्की की बातें करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनों के बीच ही उपेक्षा की ऐसी खाई बन चुकी है कि एक बुजुर्ग डॉक्टर को उनके ही घर में ‘तिल-तिल’ मरने के लिए छोड़ दिया।
करनाल के एक पॉश इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग डॉक्टर पिछले डेढ़ साल से जिस नर्क में रह रहे थे, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। जब रेस्क्यू टीम उनके घर पहुंची, तो वहां का नजारा देख दंग रह गई। जिस घर को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा था, वही अब उनके लिए कैदखाना बन चुका था। महीनों से न कपड़े बदले थे, न शरीर पर मांस का लोथड़ा बचा था। घर में गंदगी, अव्यवस्था और स्वास्थ्य की ऐसी अनदेखी थी कि टीम के सदस्य भी ठिठक गए।
करनाल में मरीजों का निःशुल्क इलाज करने वाले डॉ. हरकृष्ण की दयनीय हालत को देखकर हर कोई दंग रह गया। मीरा घाटी क्षेत्र के एक मकान से अपना आशियाना की टीम ने उनको बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। जब टीम पहुंची तो डॉ. हरकृष्ण सिंह (75) एक खाट पर पड़े हुए थे। मल-मूत्र से लिपटे उनके बदन पर कीड़े चल रहे थे। हालत इतनी खराब थी कि टीम ने जैसे ही उनके पुराने जर्जर मकान का दरवाजा खोला तो गली में बदबू फैल गई।
बुजुर्ग डॉक्टर न तो बेसहारा थे और न ही गरीब। उनके बेटा और बेटी दोनों ऑस्ट्रेलिया में शानदार जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन विडंबना देखिए, जिस पिता ने उन्हें काबिल बनाया, उन्हीं का हाल जानने के लिए उनके पास एक फोन कॉल तक का समय नहीं था। बताया जा रहा है कि डेढ़ साल से बच्चों ने पिता की सुध नहीं ली, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट गए।
जब पड़ोसियों ने डॉक्टर साहब के घर से कोई हलचल सुनाई नहीं दी और उनकी दयनीय स्थिति का अंदाजा हुआ, तो उन्होंने एक सामाजिक संस्था को सूचना दी। रेस्क्यू का जो वीडियो सामने आया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। उसमें संस्था के लोग हड्डियों का ढांचा बन चुके बुजुर्ग को चादर में उठाकर ले जाते दिख रहे हैं। लाचारी का आलम यह था कि वे बीमारियों से घिरे हुए थे और खुद पानी पीने तक की स्थिति में नहीं थे।
इस घटना ने एक बार फिर समाज में अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा और नैतिक मूल्यों पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जो बच्चे अपने माता-पिता को इस हाल में छोड़ देते हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि सरकार को ऐसे सख्त कानून बनाने की मांग भी रख रहे हैं। बीते दिनों सोशल मीडिया पर जब यह वीडियो वायरल हुई थी, तब भी लोगों में खूब रोष दिखा।
